PoK में पाकिस्तान के खिलाफ भड़की बगावत, मुनीर की सेना कर रही कत्‍लेआम!

  • 5:57
  • प्रकाशित: जुलाई 15, 2026

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में 78 साल बाद पहली बार आवाम सड़कों पर उतरकर खुलेआम आजादी की मांग कर रही है. महंगाई, भुखमरी और मंदी से त्रस्त PoK की जनता अब इस्‍लामाबाद के शासन को नकार रही है. JAAC ने 'मुजफ्फराबाद चलो' का आह्वान किया है और साफ कहा है कि ये इलाका "मुनाजा" नहीं बल्कि "मकबूजा" है - यानी पाकिस्तान का अवैध कब्जा. इस महीने PoK में चुनाव होने वाले हैं. इस्‍लामाबाद चाहता है कि फिर से कठपुतली सरकार बने, लेकिन जनता अब अपनी तकदीर खुद तय करना चाहती है. आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना ने रावलकोट से कोटली और बहिमबर तक सड़कों को छावनी में बदल दिया. 17,000 से ज्यादा सैनिक, बख्तरबंद गाड़ियां, खाने-पीने की नाकेबंदी और इंटरनेट बंदी के बावजूद लोग पीछे नहीं हटे. सेना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं. झूठे हथियार बरामदगी का नाटक भी किया गया. इस दमन में अब तक 28 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. बावजूद इसके PoK का बच्चा-बच्चा सड़कों पर है. जेएएसी ने अल्टीमेटम दिया है - गिरफ्तार नेताओं को रिहा करो, इंटरनेट बहाल करो, आटे-बिजली पर टैक्स खत्म करो. मांगें न मानी गईं तो आंदोलन पाकिस्तान के वजूद को हिला देगा. PoK की जनता का गुस्सा जायज है क्योंकि दशकों से पाकिस्तान यहां के संसाधनों को लूट रहा है और बदले में कुछ नहीं दे रहा. रावलकोट में भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग ग्राउंड में जमा हुए. ये सिर्फ विरोध नहीं, 78 साल के जुल्म के खिलाफ बगावत है. सवाल अब यही है कि क्या इस बार PoK को उसका हक मिलेगा, या इस्‍लामाबाद फिर से ताकत के बल पर आवाज दबा देगा.