पश्चिमी एशिया में युद्ध को 24 दिन पूरे हो चुके हैं और हालात हर गुजरते घंटे के साथ और अधिक तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार जारी हैं. अब यह टकराव उस मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां से या तो बड़ा युद्ध छिड़ सकता है या फिर कूटनीति का रास्ता निकल सकता है. इस पूरे संघर्ष के केंद्र में अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है, जो दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है. वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां पैदा हुआ संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है.
ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम, समय तेजी से खत्म
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोला जाए, नहीं तो उसे “गंभीर अंजाम” भुगतने होंगे. अब इस डेडलाइन में 24 घंटे से भी कम समय बचा है, जिससे सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं और तेज हो गई हैं.
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई की तो ईरान के बड़े पावर प्लांट और एनर्जी ठिकाने निशाने पर हो सकते हैं. हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, “शांति ताकत से आती है”, जिसे सीधे तौर पर सैन्य दबाव की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
ईरान की दो टूक चेतावनी: तेल ही नहीं, पानी और बिजली भी निशाने पर
ईरान ने अमेरिकी धमकी के जवाब में साफ कर दिया है कि अगर उसके एनर्जी एसेट्स पर हमला हुआ तो वह खाड़ी देशों की पानी और बिजली आपूर्ति बाधित कर सकता है. यह चेतावनी बेहद गंभीर मानी जा रही है क्योंकि सऊदी अरब, यूएई, क़तर, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देश 70 से 90 प्रतिशत तक पीने के पानी के लिए डिसेलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं.
ईरान का कहना है कि फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुश्मन देशों के लिए बंद है, लेकिन अगर हमला हुआ तो इसे पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. इस बयान ने वैश्विक शिपिंग, तेल बाजार और बीमा कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी है.
वास्तव में कितना खुला है होर्मुज?
ईरान का दावा है कि उसने कानूनी रूप से जलडमरूमध्य को बंद नहीं किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज सुरक्षित नहीं माना जा रहा. एक समय जहां इस रूट से रोज करीब 120–130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 5–6 जहाजों तक सिमट चुकी है, वो भी ज्यादातर ईरान‑समर्थक देशों के.
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान के पास तेज़ हमला करने वाली नौकाएं, टॉरपीडो, मिसाइलें और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं, जिससे वह इस 31 किलोमीटर चौड़े संकरे रास्ते को लंबे समय तक बाधित करने की क्षमता रखता है.
अमेरिका की सैन्य तैयारी, लेकिन रास्ता अभी खुला?
अमेरिका ने पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. हजारों अतिरिक्त सैनिक, युद्धपोत और हवाई ताकत तैनात की जा चुकी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति अब भी “Escalate to De‑escalate” यानी दबाव बढ़ाकर बातचीत की मेज तक लाने की है. ईरान भी बातचीत के संकेत दे रहा है, लेकिन उसकी शर्त साफ है. पहले हमले रुकें, नुकसान की भरपाई पर बात हो और भविष्य में हमले न होने की ठोस गारंटी दी जाए.
तेल की कीमतें और वैश्विक असर
तनाव का असर बाज़ारों पर दिखने लगा है. तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है और शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं. विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर होर्मुज में टकराव और बढ़ा तो इसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका तक महसूस होगा.