ग्लोबल सिक्योरिटी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारे से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने वाशिंगटन से लेकर इस्लामाबाद तक के रणनीतिकारों को अपने नक्शे और नीतियां दोबारा खंगालने पर मजबूर कर दिया है। जियो पॉलिटिक्स की बिसात पर यह इस सदी का सबसे बड़ा कूटनीतिक मोड़ है, जिसने साबित कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न तो कोई दोस्ती परमानेंट होती है और न ही कोई दुश्मनी। जिस तालिबान को मिटाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका ने 20 साल तक पानी की तरह पैसा बहाया और अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंक दी, आज उसी तालिबान को रूस ने अपनी सरजमीं पर न सिर्फ 'रेड कारपेट वेलकम' दिया है, बल्कि दोनों के बीच एक ऐतिहासिक सैन्य-तकनीकी समझौता (Military-Technical Pact) भी हो गया है।