मैं नाचने-गाने वाली तो वो धर्मगुरु क्या हुए... हर्षा रिछारिया का Exclusive इंटरव्यू, बताया- क्यों लाखों के कर्ज में आ गईं | Read

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  • प्रकाशित: जनवरी 13, 2026

प्रयागराज: पिछले साल प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अपनी सुंदरता और सादगी से सोशल मीडिया पर रातों-रात सनसनी बनने वाली हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लेकिन इस बार वजह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि धर्म और सत्संग के मार्ग को छोड़कर वापस अपने पुराने काम (एंकरिंग और एक्टिंग) पर लौटने का उनका चौंकाने वाला फैसला है.

 

"मैं कभी साध्वी थी ही नहीं"

NDTV के साथ एक विशेष बातचीत में हर्ष रिछारिया ने सबसे पहले अपने नाम के साथ लगे 'साध्वी' टैग पर आपत्ति जताई. उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं कभी साध्वी थी ही नहीं. यह टैग मीडिया के कुछ वर्गों ने मेरे साथ जोड़ दिया था. मैं एक एंकर और एक्टर रही हूं और मुझे हर्षा रिछारिया के नाम से ही जाना जाए."

 

धर्म की राह में मिली शांति या मानसिक प्रताड़ना?

जब हर्षा से पूछा गया कि धर्म के मार्ग पर चलने से क्या उन्हें सुख, समृद्धि और शांति मिली, तो उनका दर्द छलक उठा. हर्ष ने कहा कि समाज और खुद के धर्म के लोग ही बार-बार उंगली उठाते हैं और चरित्र हनन करते हैं. उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें टीआरपी और शोहरत तो मिली, लेकिन उसके साथ ही वह कई बार सुसाइडल थॉट (आत्मघाती विचारों) से गुजरी हैं. उन्होंने खुलासा किया कि वह इस वक्त लाखों रुपये के कर्ज में हैं. "आज की डेट में भिक्षा भी आसानी से नहीं मिलती, जीवन जीने के लिए राशन खरीदना पड़ता है और दुकानदार उधार नहीं देता." हर्षा ने आरोप लगाया कि कुछ स्थापित धर्मगुरु उन्हें 'प्रतिद्वंद्वी' (Competitor) के रूप में देखते हैं और उनके काम में रुकावटें पैदा करते हैं.

 

"माघ मेले में मुझे नाचने-गाने वाली कहा गया"

हर्षा ने भावुक होते हुए बताया कि हाल ही में माघ मेले में जब उन्होंने जमीन आवंटित कराने की कोशिश की, तो उनका विरोध हुआ. उन्हें 'नाचने-गाने वाली' कहकर अपमानित किया गया और सवाल उठाए गए कि एक इन्फ्लुएंसर माघ मेले में क्या करेगी. उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा, "आज कौन सा ऐसा धर्मगुरु है जो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं है? फिर तो वे सब भी इन्फ्लुएंसर ही हुए."

 

क्या अधूरा रह जाएगा बेटियों को बचाने का सपना?

हर्षा रिछारिया का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से बचाना और बेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाकर 'वीरांगना' बनाना था. लेकिन वर्तमान परिस्थितियों से तंग आकर उन्होंने कहा, "हो सकता है ऊपर वाला चाहता हो कि मैं पहले खुद के लिए पैसे बचाऊं, फिर ये काम करूं. अभी फिलहाल कोई मुझे ये करने नहीं दे रहा है."

 

विद्रोही मानसिकता के साथ वापसी

अपने भविष्य की योजना बताते हुए हर्षा ने संकेत दिया कि यदि वह इस प्रचार-प्रसार को छोड़ती हैं, तो वह एक विद्रोही मानसिकता के साथ जाएंगी क्योंकि अपनों ने ही उन्हें धकेला और उनका तिरस्कार किया है.