भारत ने दिखाया अर्जुन, नाग-ब्रह्मोस और पिनाका का दम, आर्मी डे परेड का VIDEO देख होगा गर्व

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  • प्रकाशित: जनवरी 15, 2026

आर्मी डे परेड पर भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी हथियार प्रणालियों और मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन हो रहा है. मेजर अमन के नेतृत्व में मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन ने परेड का अगला दस्ता संभाला, जिसके साथ नायब रिसालदार प्रतिश भी शामिल रहे.

मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन: हर दुर्गम इलाके को पार करने में सक्षम

अर्जुन टैंक 120 मिमी की मेन राइफल गन, 12.7 मिमी एंटी‑एयरक्राफ्ट मशीन गन और 7.62 मिमी कोएक्सियल मशीन गन से लैस है. यह टैंक 70 किमी/घंटा की अधिकतम गति, 40 किमी/घंटा की क्रॉस‑कंट्री स्पीड के साथ रेगिस्तान से लेकर कठिन भूभाग तक हर इलाके में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम है.

इसके कवच की क्षमता दुनिया के किसी भी आधुनिक टैंक को भेदने में सक्षम बताई जाती है. इसकी शक्ति और फुर्ती इसे भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति का मुख्य स्तंभ बनाती है.

नाग मिसाइल सिस्टम: दुश्मन के टैंकों का घातक विनाशक

अर्जुन टैंक के बाद परेड में भारतीय सेना की सामरिक क्षमता का प्रतीक नाग मिसाइल सिस्टम सलामी मंच के पास पहुंचा. कैप्टन अंकित कुमार के नेतृत्व में इस टैंक‑विध्वंसक प्रणाली का प्रदर्शन किया गया. नाग मिसाइल 4 किलोमीटर की दूरी से शत्रु के टैंक को नष्ट करने में सक्षम है, टोही दस्तों को सुरक्षा देने के लिए डिज़ाइन की गई है, स्वदेशी ‘नाविका ट्रैक्ड आर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल’ पर आधारित है.

 

इसमें छह नाग एंटी‑टैंक गाइडेड मिसाइल एक साथ दागी जा सकती हैं. K9 Vajra-T: लंबी दूरी तक फायर सपोर्ट का भरोसेमंद हथियार. इसके बाद परेड में आगे बढ़ा K9 Vajra‑T हॉवित्जर. दो मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट राघवेन्द्र आज़ाद इसके नेतृत्व में दिखे.

 

यह स्व-चालित तोप 66 किमी/घंटा गति से रेगिस्तानों में भी दौड़ सकती है, 155 मिमी, 52 कैलिबर की गन से 40 किमी दूर तक प्रहार कर सकती है. न्यूक्लियर और बायोलॉजिकल युद्ध परिस्थितियों में भी कार्य करने की क्षमता इसे बेहद खास बनाती है.

 

स्पेशलिस्ट मोबिलिटी व्हीकल: हर मौसम और भूभाग में सक्षम

इन्फैंट्री कॉलम का अगला वाहन था स्पेशलिस्ट मोबिलिटी व्हीकल (SMV), जिसका नेतृत्व द्वितीय गढ़वाल राइफल्स के नायक सूबेदार संदीप चमोली कर रहे थे. यह वाहन दलदल, रेगिस्तान, बर्फ और पथरीली सतह पर सहजता से चलता है, –50°C से लेकर अत्यधिक गर्मी में अपनी क्षमता साबित करता है, 40 किमी/घंटा स्पीड और 1200 किलोग्राम भार क्षमता रखता है.

 

पंजाब में आई बाढ़ के दौरान इसने बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई थी. पिनाका मल्टी‑रॉकेट लॉन्चर सिस्टम: स्वदेशी शक्ति का प्रतीक. इसके बाद परेड में आगे बढ़ा पिनाका रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, जो ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभा चुका है.

 

यह 214 मिमी कैलिबर के 12 रॉकेट एक साथ दागने में सक्षम है.1890 रॉकेट रेजिमेंट के नायब सूबेदार जयसिंह ने इसका नेतृत्व किया. लंबी दूरी तक ऑल‑वेदर फायर पावर देने की क्षमता इसे भारतीय थलसेना का शक्तिशाली हथियार बनाती है.

 

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम: भारत का रणनीतिक ब्रह्मास्त्र

इसके बाद परेड में दिखाई दिया ऑपरेशन सिंदूर का ब्रह्मास्त्र: ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल सिस्टम. 889 मिसाइल रेजिमेंट के कैप्टन पुखराज कौशिक इसके नेतृत्व में सलामी मंच के सामने से गुजरे.

 

ब्रह्मोस 450 किमी की मारक क्षमता के साथ, जल्द ही 800 किमी तक प्रहार करने में सक्षम होगा, भूमि, जल, वायु हर प्लेटफॉर्म से लॉन्च हो सकता है. यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है.

आकाश मिसाइल सिस्टम: हवा में उड़ते दुश्मन का विनाशक

अंत में भारतीय सेना की प्रथम स्वदेशी एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली आकाश मिसाइल सिस्टम का भव्य प्रदर्शन किया गया. यह 150 किमी तक हवाई निगरानी कर सकती है, 25 किमी की दूरी पर दुश्मन के लड़ाकू विमान को नष्ट कर सकती है. 27 एयर डिफेंस मिसाइल रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट अमरेश सिंह चौहान ने इस प्रणाली का नेतृत्व किया.