- त्रियुगीनारायण में कड़ाके की ठंड और बर्फ के बीच बसंत पंचमी पर 7 जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से शादी की.
- देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से लोग शिव-पार्वती विवाह स्थल पर शादी के लिए आ रहे हैं.
- रुद्रप्रयाग जिले का बधानीताल क्षेत्र बर्फबारी से ढका हुआ है, जिसने पर्यटन आकर्षण को बढ़ाया है.
कड़ाके की ठंड और चारों ओर जमी बर्फ के बीच, भगवान शिव‑पार्वती के पावन विवाह स्थल त्रियुगीनारायण में बसंत पंचमी के अवसर पर 7 जोड़ों ने विवाह कर इतिहास रच दिया. चारों ओर फैली सफेद बर्फ और साफ आसमान के बीच संपन्न हुए इन विवाह समारोहों ने त्रियुगीनारायण को किसी स्वप्नलोक जैसा बना दिया. बर्फबारी के बावजूद पारंपरिक रीति‑रिवाजों के साथ विवाह संपन्न हुए, जिसका दृश्य बेहद मनोहारी रहा.
बर्फ से ढकी धरती पर वैवाहिक मंत्रों की गूंज
लगातार बर्फबारी के बाद जब शनिवार को मौसम साफ हुआ, तो त्रियुगीनारायण मंदिर और आसपास का इलाका बर्फ की सफेद चादर में ढका नजर आया. इसी बर्फीले माहौल में विवाह मंडप सजे और वैदिक मंत्रों के बीच नवयुगलों ने अग्नि के फेरे लिए. ठंड के बीच शादी के इस अनोखे संगम को देखने के लिए स्थानीय लोग और परिजन भी उत्साहित नजर आए.
यहां हर वर्ष विवाह के लिए नवयुगलों की संख्या बढ़ रही है. देश के विभिन्न राज्यों के साथ‑साथ विदेशों से भी लोग शिव‑पार्वती विवाह स्थली में शादी करने पहुंच रहे हैं.
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त्रियुगीनारायण और बधानीताल में बर्फबारी से निखरी प्राकृतिक छटा
त्रियुगीनारायण के साथ‑साथ रुद्रप्रयाग जनपद का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बधानीताल भी बर्फबारी के चलते सफेद चादर में लिपट गया है. ताल के चारों ओर जमी बर्फ और शांत वातावरण ने इलाके की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा दिया है, जिससे पर्यटक भी भारी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं.
केदार नगरी चार फीट बर्फ में ढकी
उधर, केदारनाथ धाम में लगातार हुई भारी बर्फबारी के चलते पूरी केदार नगरी लगभग चार फीट मोटी बर्फ की चादर में ढक गई है. बर्फ जमने के कारण धाम के सभी पैदल मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं और आवागमन ठप पड़ा है. मंदिर प्रांगण में घुटनों तक बर्फ जमी हुई है, जिससे क्षेत्र में ठंड काफी बढ़ गई है.
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शुक्रवार को केदारनाथ धाम सहित उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हुई. हालांकि, भारी बर्फ के बावजूद बाबा केदारनाथ की नगरी की प्राकृतिक सुंदरता और अधिक निखर कर सामने आई है.













