जवाब दो नहीं तो नौकरी से निकाल देंगे; UP में मृत महिला को थमा दिया नोटिस, बेटा बोला-स्वर्ग जाकर मां से पूछूंगा

उत्तर प्रदेश के महोबा में तो हद ही हो गई.यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को नोटिस थमा दिया है जिसका निधन हुए लगभग 18 महीने बीत चुके हैं. अधिकारियों ने मृत महिला को नोटिस थमाकर दो दिन के अंदर जवाब भी मांगा है.

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  • उत्तर प्रदेश के महोबा में बाल विकास विभाग ने लगभग डेढ़ साल पूर्व निधन हो चुकी महिला कर्मचारी को नोटिस भेजा
  • मृत महिला पार्वती को आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका पद पर तैनात किया गया था और उसकी मृत्यु बीमारी से हुई थी
  • पति किशुनलाल ने कहा कि मृत्यु प्रमाणपत्र आठ दिन में विभाग को सौंप दिया गया था बावजूद इसके नोटिस जारी हुआ
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महोबा:

कहते हैं सरकारी तंत्र की फाइलें कभी नहीं मरतीं, लेकिन उत्तर प्रदेश के महोबा में तो हद ही हो गई.यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला कर्मचारी को नोटिस थमा दिया है जिसका निधन हुए लगभग 18 महीने बीत चुके हैं. अधिकारियों ने मृत महिला को नोटिस थमाकर दो दिन के अंदर जवाब भी मांगा है. मामला महोबा के पनवाड़ी विकासखंड के नैपुरा गांव का है. 

मृत महिला को नोटिस, 2 दिन में मांगा जवाब 

ऊपर की तस्वीर में दिख रहा यह शख्स किशुनलाल है, जिसके एक हाथ में मृत हो चुकी उसकी पत्नी की तस्वीर है और दूसरे हाथ में उसका डेथ सर्टिफिकेट है.लेकिन इस दुख के बीच विभाग ने उसके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है. मामला महोबा के नैपुरा गांव का है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर तैनात पार्वती की मृत्यु 1 नवंबर 2024 को बीमारी के चलते हो गई थी. पति का दावा है कि उसने 8 दिन के भीतर ही विभाग में मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर दिया था, लेकिन 18 महीने बाद पनवाड़ी की बाल विकास परियोजना अधिकारी यासमीन जहां के हस्ताक्षर से एक नोटिस जारी हुआ. इस नोटिस में मृतका पार्वती पर आरोप लगाया गया कि निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद मिला.इतना ही नहीं, विभाग ने मृतका को अल्टीमेटम दिया है कि वह 2 दिन के भीतर हॉट-कुक्ड योजना के बिल-वाउचर और रिकॉर्ड के साथ कार्यालय में उपस्थित हो, वरना सेवा समाप्त कर दी जाएगी.

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स्वर्ग जाकर पूछूंगा- मां क्यों नहीं आ रही हो?

इस नोटिस ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है.मृतका के बेटे महेश ने सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा कि अब वह यह नोटिस लेकर स्वर्ग में अपनी मां के पास जाएगा और पूछेगा कि वह ड्यूटी पर क्यों नहीं जा रही हैं. वहीं ग्रामीणों और परिजनों को अब यह अंदेशा सता रहा है कि कहीं मृतका के नाम पर पिछले 18 महीनों से कोई और तो मानदेय नहीं डकार रहा था? क्या विभाग को डेढ़ साल तक अपनी कर्मचारी की मौत की खबर तक नहीं लगी? परिजनों ने अब इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करने का मन बना लिया है.

बहरहाल, सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी फाइलों में डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी इतना बड़ा झोल संभव है? आखिर जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना रिकॉर्ड देखे एक मृतका के नाम नोटिस कैसे जारी कर दिया? अब देखना यह होगा कि किसी की मौत पर इस भद्दे भजाक के बाद विभाग के इन लापरवाह जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है.

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