- प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच सात दिनों से विवाद जारी है.
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार पर औरंगजेब जैसी तुलना करते हुए मंदिरों के संरक्षण पर तीखा आरोप लगाया है
- माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने शंकराचार्य को पैदल जाने को कहा, जिससे धक्का-मुक्की हुई थी
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में बीते सात दिनों से ना तो संगम की चर्चा है और ना ही साधु-संतों की, बस चर्चा है तो शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की, और उनसे जुड़े विवादों की. ना स्वामी जी धरने से उठने के लिए तैयार हैं और ना प्रशासन ही पीछे हटने को राजी है. इन्हीं तमाम सवालों को लेकर एनडीटीवी की टीम ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बात की. इस दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखे हमले किए और उनके शासनकाल की तुलना मुगलकाल से कर दी.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर औरंगजेब वाला तंज भी कसा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से कोई पर्सनल बात नहीं है, ना उन्होंने हमसे कुछ लिया है ना हमें दिया है. लेकिन जो भी मंदिर तोड़ेगा, हमारा सगा भाई भी तोड़ेगा तो उसे औरंगजेब कहेंगे, दूसरा कोई शब्द नहीं है. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ से हमने कहा था शिव की मूर्ति अगर टूट जाने दो, आप नाथ पंथी हो, आपको रक्षा बनती है, शिव जी की नंदी को तो बचा लो.
उन्होंने आगे कहा कि यह जानकारी मिल रही थी कि रात के वक्त इस जगह पर कोई खतरा हो सकता है. शिष्यों ने पूछा कि सीसीटीवी लगा दें, हमने कहा लगा लीजिए. प्रशासन का जैसा व्यवहार है, जैसा मुख्यमंत्री रिएक्ट कर रहे हैं, जैसा आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं. क्या पता क्या कर जाएंगे.
शंकराचार्य ने कहा कि इसका अंत उन्हीं को करना है, जिन्होंने शुरू किया है. आगे चलकर कब करेंगे, उन्हीं को तय करना है, या ऐसा भी होगा कि किसी समय वह अंत करने लायक भी ना रह जाएं. यही अंतिम निष्कर्ष है.
शंकराचार्य जिस जगह पर बैठकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहां पर उनकी टीम ने एहतियातन सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए हैं. 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे हैं. जो अलग-अलग एंगल पर लगाए गए हैं. शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर उनकी टीम ने यह सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं.
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Photo Credit: IANS
घटना से नाराज शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. इस मामले में प्रशासन की ओर से अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को 48 घंटे के भीतर दो नोटिस जारी किए गए. पहले नोटिस में शंकराचार्य की पदवी के प्रयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दौरान उत्पन्न विवाद को लेकर जवाब तलब किया गया.
नोटिस में माघ मेले से प्रतिबंध की चेतावनी भी दी गई थी. बाद में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने दोनों नोटिसों का जवाब प्रशासन को भेज दिया. इसके बाद से इसमें राजनीतिक दल भी कूद गए हैं.













