PM Modi Kashi Vishwanath Visit: काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने एक बार फिर देश का ध्यान भारतीय समय-गणना की प्राचीन परंपरा की ओर खींचा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी दौरे के दौरान इस विशिष्ट घड़ी का अवलोकन किया. यह घड़ी न सिर्फ समय बताती है, बल्कि सूर्योदय, पंचांग, मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति जैसी सूचनाएं भी देती है. मध्यप्रदेश सरकार की पहल पर उज्जैन से शुरू हुई यह अवधारणा अब देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच रही है. काशी में इसकी स्थापना को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और वैज्ञानिक सोच के संगम के रूप में देखा जा रहा है. सवाल यही है कि आखिर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी क्या है, यह सामान्य घड़ी से कैसे अलग है और क्यों इसे भारत के स्वाभिमान से जोड़कर देखा जा रहा है?
PM Modi Kashi Vishwanath Visit: वैदिक घड़ी देखते हुए पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने किया अवलोकन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में लगी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को करीब से देखा और इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली. यह घड़ी हाल ही में मंदिर प्रांगण में स्थापित की गई है और इसे बाबा विश्वनाथ को समर्पित किया गया है. पीएम मोदी पहले भी भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की बात दोहराते रहे हैं, ऐसे में इस घड़ी को लेकर उनका अवलोकन खास माना जा रहा है.
कैसे और कब हुई स्थापना?
यह वैदिक घड़ी 3 अप्रैल 2026 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की गई थी. इसके अगले दिन 4 अप्रैल 2026 को इसे काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया. इससे पहले उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में इसकी स्थापना हो चुकी है. काशी, देश का पहला ज्योतिर्लिंग है जहां उज्जैन के बाद यह घड़ी लगी है.
PM Modi Kashi Vishwanath Visit: विक्रमादित्य वैदिक घड़ी
क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की प्राचीन वैदिक कालगणना प्रणाली पर आधारित है. इसे महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन ने तैयार किया है. यह सामान्य घड़ियों की तरह घंटे-मिनट में समय नहीं बताती, बल्कि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को आधार मानकर चलती है. इसे वर्ष 2024 में उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही लोकार्पित किया था.
कैसे काम करती है वैदिक समय प्रणाली?
वैदिक समय प्रणाली के अनुसार एक दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा गया है.
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक: 15 मुहूर्त
- सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक: 15 मुहूर्त
हर मुहूर्त की अवधि लगभग 48 मिनट होती है, लेकिन यह स्थिर नहीं होती. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय तथा पृथ्वी पर स्थान के अनुसार इसमें बदलाव आता है. यही वजह है कि यह घड़ी हर स्थान के लिए स्थानीय समय के अनुसार काम करती है.
मुहूर्त, कला और काष्ठा का गणित
इस घड़ी में समय की सूक्ष्म गणना भी दिखाई देती है.
- 1 मुहूर्त = 30 कला
- 1 कला = 96 सेकंड
- 1 कला = 30 काष्ठा
- 1 काष्ठा = 3.2 सेकंड
यह गणना सूर्य के कोण और भौगोलिक स्थिति के अनुसार बदलती रहती है, जिससे समय प्रकृति के अधिक करीब रहता है.
घड़ी में क्या-क्या जानकारी मिलती है?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी सिर्फ समय नहीं बताती. इसमें
- वैदिक समय
- भारतीय मानक समय (IST)
- स्थान (लोकेशन)
- पंचांग, तिथि, नक्षत्र
- विक्रम संवत का महीना
- सूर्य और चंद्र की राशि
- मुहूर्त, योग, करण
जैसी जानकारियां एक साथ दिखाई देती हैं.
संस्कृति और विज्ञान का संगम
संस्कृति विशेषज्ञों के मुताबिक यह घड़ी आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान का सटीक मेल है. मध्यप्रदेश सरकार का मानना है कि इससे युवा पीढ़ी भारतीय परंपराओं से जुड़ सकेगी. भविष्य में राम मंदिर सहित देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी वैदिक घड़ी लगाने की योजना है.
क्यों है खास?
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की उस सोच को सामने लाती है, जिसमें समय को केवल मशीन से नहीं, बल्कि सूर्य और प्रकृति से जोड़कर देखा जाता है. काशी में इसकी स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है.
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