पुलिस भर्ती का 'पंडित' विवाद... क्या UP में ब्राह्मणों की नाराजगी BJP का 'विजय रथ' रोक देगी?

कहा जाता है कि ब्राह्मण समाज को दिशा देने का काम करता है. ऐसे में सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष से जुड़े दल भी ब्राह्मणों को रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने पिछले महीने आजमगढ़ में बड़ी रैली करके दावा किया कि एक लाख लोगों की भीड़ रैली में आई और उसमें से दस हजार ब्राह्मण समाज से थे. मैसेज साफ़ है, क्षेत्रिय दल भी ब्राह्मणों को खुला ऑफर दे रहे हैं. 

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के मुद्दे को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं.
  • समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को टिकटों में प्राथमिकता दे सकती है.
  • बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल ब्राह्मणों को साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है और इसे लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां साधने में जुटे हैं. हाल ही में पुलिस भर्ती परीक्षा के विवादित प्रश्न, यूजीसी की गाइडलाइन का मामला, अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद या फिर भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बैठ. हर मुद्दे पर विपक्षी दलों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा ब्राह्मणों की हितैषी नहीं है.

बात करें समाजवादी पार्टी की तो सपा बीते दो सालों से पीडीए के रथ पर सवार है. पीडीए यानी पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति का फॉर्मूला. हालांकि, इस पीडीए में जो “ए” है, वो समय समय पर बदलता रहा है. मौका देखकर 'ए' से अल्पसंख्यक की जगह इसे 'ए' से अगड़ा किया जाता है. माना जा रहा है कि सपा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण वोट साधने के लिए टिकटों में ब्राह्मणों को तरजीह देते दिखाई दे सकती है. 

ब्राह्मण क्या बीजेपी से नाराज है?

ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब चुनाव के वक्त ही पता चल सकता है. लेकिन राजनैतिक दलों को पता है कि ये एकदम सही वक्त है ऐसे मुद्दों को उठाने का. अगर ये कोशिश कामयाब हो जाए तो विधानसभा चुनाव पर बड़ा असर पड़ सकता है. शायद यही वजह है कि ना सिर्फ सपा, बल्कि बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने ब्राह्मणों को साथ आने का खुला मैसेज दे दिया है.

कहा जाता है कि ब्राह्मण समाज को दिशा देने का काम करता है. ऐसे में सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष से जुड़े दल भी ब्राह्मणों को रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने पिछले महीने आजमगढ़ में बड़ी रैली करके दावा किया कि एक लाख लोगों की भीड़ रैली में आई और उसमें से दस हजार ब्राह्मण समाज से थे. मैसेज साफ़ है, क्षेत्रिय दल भी ब्राह्मणों को खुला ऑफर दे रहे हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें :  2 पहुंचे, बाकी 19 भी आएंगे? रंग लाई भारत की मुहिम, होर्मुज से जहाजों को लाने के मिशन की इनसाइड स्टोरी

10 फीसदी आबादी, मुद्दा इतना बड़ा क्यों है?
सवाल उठता है कि 10 फीसदी के करीब वाली ब्राह्मणों की आबादी का मुद्दा इतना बड़ा क्यों है? दरअसल, सदियों से पढ़ी लिखी जाति होने की वजह से ब्राह्मण आबादी में कम होने के बावजूद प्रभावी माना जाता है. यूपी में कहावत है कि एक ब्राह्मण अपने दम पर दूसरी जातियों के कम से कम दो होते अपने प्रभाव से डलवाता है. इसी वजह से हर दल को लगता है कि अगर ब्राह्मण उनकी साइड आ जाये तो असर बड़ा हो सकता है.

Advertisement

जब BSP ने बदल दिया था 'खेल'

उत्तर प्रदेश में माना जाता है कि ब्राह्मण आम तौर पर बीजेपी का पक्षधर रहा है. साल 2007 में बीएसपी प्रमुख मायावती ने एक फॉर्मूला बनाया, जिसमें दलितों को ब्राह्मणों के साथ लाने का काम किया. नतीजा ये हुए था कि लंबे अरसे बाद यूपी में किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिला था. तब 403 सीटों में से बीएसपी ने 207 सीटें जीतीं थीं. इसके बाद 2012 में जनेश्वर मिश्रा सपा के ब्राह्मण चेहरे थे, तब भी माना गया कि ब्राह्मणों का एक हिस्सा सपा के साथ गया और 225 सीटों के साथ सपा की सरकार बनी.

फ़िलहाल ब्राह्मण किसके साथ जाएगा, किसके नहीं, ये तो नहीं कहा जा सकता. लेकिन जिस तरह से ब्राह्मणों ने अपनी बात को चुनाव से पहले रखा है, उसको देखकर राजनैतिक विशेषज्ञ ये मान रहे हैं कि टिकट बंटवारे में ब्राह्मणों को इसका फायदा जरूर मिल सकता है. चुनाव से पहले अगर ब्राह्मण किसी दल को लेकर ये माहौल बनाने में सफल हुए कि फ़लां ने ब्राह्मणों का ख्याल नहीं रखा, तो उसको नुकसान जरूर हो सकता है. जो भी हो लेकिन अगले साल के चुनाव में ब्राह्मणों का मुद्दा बड़ा जरूर रहेगा, ये अभी से दिखाई दे रहा है. 

ये भी पढ़ें : केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सरकार कब करेगी महंगाई भत्ते का ऐलान? 18000 से 2 लाख तक वालों की कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?

Featured Video Of The Day
Election 2026 Date Announcement: उठाया चुनाव आयोग पर सवाल! फिर बीच डिबेट जो हुआ | Sucherita Kukreti