पब्लिक सेफ्टी किराएदारों के अधिकारों से ऊपर... वाराणसी में जर्जर भवन को गिराने पर रोक से इलाहाबाद हाई कोर्ट का इनकार

स्टैंडिंग काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि खतरनाक बिल्डिंग बारे में नोटिस 2021 में जारी किया गया था और याचिकाकर्ता ने भवन का एक हिस्सा पहले ही गिरा दिया है. हालांकि कुछ किरायेदार अभी भी बाकी हिस्से में रह रहे हैं जिसकी मरम्मत नहीं की गई है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खतरनाक घोषित भवन को गिराने में पब्लिक सेफ्टी को किराएदारों के अधिकारों से ऊपर माना है
  • वाराणसी नगर निगम को दो हफ्ते में जर्जर बिल्डिंग गिराने और पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है
  • यूपी टेनेंसी एक्ट के तहत किराएदार खतरनाक भवन में लगातार रहने का अधिकार नहीं रखते और जान को खतरा नहीं डाल सकते
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
प्रयागराज/वाराणसी:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी से जुड़े एक जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने महत्वपूर्ण फैसले में टिप्पणी करते कहा है कि पब्लिक सेफ्टी किराएदारों के अधिकारों से ऊपर है। यूपी रेगुलेशन ऑफ अर्बन प्रेमिसेस टेनेंसी एक्ट, 2021 के तहत, किराएदार की जगह पर कब्जा करने के अधिकार का इस्तेमाल खतरनाक घोषित भवन में लगातार रहने के लिए नहीं किया जा सकता, न ही ऐसे अधिकार का इस्तेमाल रहने वालों या आम लोगों की जान को खतरे में डालने के लिए किया जा सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब कोई बिल्डिंग इंसानों के रहने के लिए ठीक नहीं पाई जाती तो म्युनिसिपल अथॉरिटीज को कानूनी तौर पर उसे गिराने का अधिकार होता है और किराएदार ऐसी कानूनी कार्रवाई में रुकावट नहीं डाल सकते. ऐसे मामलों में प्रशासन को वैधानिक अधिकारों के तहत तुरंत कार्रवाई करने की छूट है. कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ प्रतिवादी नंबर तीन वाराणसी नगर निगम नंबर को दो हफ्ते के अंदर बिल्डिंग को गिराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि रेस्पोंडेंट अथॉरिटी कानून के मुताबिक बिल्डिंग को गिराने में हुए खर्च को याचिकाकर्ता से वसूल सकती है. यह आदेश जस्टिस नीरज तिवारी और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिविजन बेंच ने मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति वाराणसी व अन्य की याचिका पर दिया है. 

क्या है पूरा मामला,समझिए 

वाराणसी के मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति वाराणसी व अन्य की तरफ से दाखिल याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिस्पॉन्डेंट अथॉरिटीज को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वो याची मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति की बिल्डिंग को गिरा दे जो इंग्लिशियालाइन, हाउस नंबर S-21/71-A वाराणसी में है. याचिकाकर्ता के अनुसार यह बिल्डिंग बहुत खराब हालत में है और आने-जाने वालों के साथ-साथ बिल्डिंग और उसके आस-पास रहने वाले लोगों के लिए भी खतरा बन सकती है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि प्रतिवादी नंबर तीन नगर निगम, वाराणसी ने तीन अगस्त 2021 को उत्तर प्रदेश म्युनिसिपैलिटीज़ एक्ट, 1959 के सेक्शन 331(1)(2) के तहत एक नोटिस जारी किया था जिसमें सात दिनों के अंदर असुरक्षित भवन को गिराने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट के सामने 
अभ्यावेदन दिया. कोर्ट में कहा गया कि म्युनिसिपल कमिश्नर ने पुलिस स्टेशन सिगरा से एक रिपोर्ट मांगी थी जिसने 21 आगत 2021 को एक विस्तृत रिपोर्ट दी जिसमें यह कन्फर्म किया गया कि बिल्डिंग जर्जर हो गई थी और उसे गिराने की जरूरत थी. इसके बावजूद कोई असरदार एक्शन नहीं लिया गया.नतीजतन 29 अगस्त 2025 को बिल्डिंग का एक हिस्सा गिर गया जिससे ट्रैफिक में रुकावट आई और पब्लिक सेफ्टी को गंभीर खतरा पैदा हो गया था. 

स्टैंडिंग काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि खतरनाक बिल्डिंग बारे में नोटिस 2021 में जारी किया गया था और याचिकाकर्ता ने भवन का एक हिस्सा पहले ही गिरा दिया है. हालांकि कुछ किरायेदार अभी भी बाकी हिस्से में रह रहे हैं जिसकी मरम्मत नहीं की गई है.आगे यह भी कहा गया है कि एक किरायेदार ने मालिक के खिलाफ 2021 में वाद दायर किया था और कार्रवाई अभी भी पेंडिंग है जिस बात को याची ने कथित तौर पर छिपाया है.

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति की बिल्डिंग को आधिकारिक तौर पर खतरनाक घोषित कर दिया गया है और 2021 का ध्वस्तीकरण नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है इसलिए यहां रहने वालों पर कानूनी तौर पर जगह खाली करने की जिम्मेदारी है.कोर्ट ने माना कि संरचनात्मक खतरे के साफ सबूत और 29 अगस्त 2025 को बिल्डिंग का कुछ हिस्सा गिरने के बावजूद किराएदारों का लगातार कब्जा सेक्शन 334(3) के सीधे खिलाफ है इसलिए म्युनिसिपल कमिश्नर को सेक्शन 334(4) के तहत रहने वालों को हटाने और ध्वस्तीकरण कार्यवाही पक्का करने के लिए पुलिस की मदद लेने का पूरा अधिकार है.

कोर्ट ने कहा कि कोर्ट इस तय कानूनी स्थिति पर भी ध्यान देता है कि पब्लिक सेफ्टी किराएदारों के अधिकारों से ऊपर है. यूपी रेगुलेशन ऑफ अर्बन प्रेमिसेस टेनेंसी एक्ट, 2021 के तहत किराएदार की जगह पर कब्ज़ा करने के अधिकार का इस्तेमाल खतरनाक घोषित किए गए भवन में लगातार रहने के लिए मजबूर करने के लिए नहीं किया जा सकता है न ही ऐसे अधिकार का इस्तेमाल रहने वालों या पब्लिक को जान का खतरा डालने के लिए किया जा सकता है.कोर्ट ने यह भी कहा कि किरायेदारी कानून सुरक्षा देता है पर जनसुरक्षा के सामने उसकी सीमा है। हालांकि निवासियों को सामान निकालने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए.कोर्ट ने नगर निगम को दो हफ्ते में ध्वस्तीकरण पूरा करने और पुलिस प्रशासन को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि तथ्यों और हालात को देखते हुए कोर्ट इस बात से सहमत है कि जिस बिल्डिंग की बात हो रही है वो बहुत खराब हालत में है और किराएदारों के साथ विवाद सुलझने का इंतजार किए बिना उसे गिरा देना चाहिए. टेनेंसी एक्ट के नियमों के तहत उनके जो भी अधिकार है वे हमेशा उनके पास रहेंगे और इसे बिल्डिंग को गिराने में और देरी करने का आधार नहीं माना जा सकता.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Donald Trump का खतरनाक सीक्रेट प्लान, क्या Iran के Supreme Leader Khamenei की होगी हत्या?