What is TAN: प्राइवेट हो या गवर्नमेंट नौकरी, हर सैलरीड व्यक्ति को हर महीने सैलरी के साथ एक सैलरी स्लिप मिलती है. ये स्लिप सिर्फ सैलरी का कागज नहीं होती, बल्कि इसमें आपकी इनकम, टैक्स और सेविंग से जुड़ी कई अहम जानकारियां छुपी होती हैं. इसमें बेसिक सैलरी, HRA, अलग-अलग अलाउंसेस, PF और टैक्स डिडक्शन का पूरा हिसाब लिखा होता है. अब, अक्सर सैलरी स्लिप में UAN और PAN तो सबको दिख जाता है, लोगों को PAN और UAN का मतलब भी पता होता है, लेकिन इनसे अलग स्लिप पर TAN भी होता है. अधिकतर लोग इसका मतलब नहीं जानते हैं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से एक हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. आइए जानते हैं TAN क्या होता है और आपकी सैलरी स्लिप में इसका क्या मतलब होता है.
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TAN क्या होता है?
TAN की फुल फॉर्म Tax Deduction and Collection Account Number होती है. यह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किया गया 10 अंकों का अल्फा-न्यूमेरिक नंबर होता है, जैसे- ABCD12345E.
यह नंबर उन संस्थाओं या लोगों को दिया जाता है जो किसी की इनकम से TDS (Tax Deducted at Source) काटते हैं या टैक्स कलेक्ट करते हैं. आमतौर पर यह नंबर आपके एम्प्लॉयर (कंपनी या ऑफिस) का होता है, न कि आपका पर्सनल.
- TDS से जुड़ी सभी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देने के लिए.
- TDS रिटर्न फाइल करने में
- Form 16 और Form 16A जारी करने के लिए और
- टैक्स डिडक्शन और टैक्स कलेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड को ट्रैक करने के लिए.
हालांकि, कुछ खास सेक्शन (जैसे प्रॉपर्टी या किराए पर TDS) में TAN की जगह PAN से भी काम चल जाता है, लेकिन सैलरी TDS के मामले में TAN बहुत अहम होता है.
सैलरी स्लिप में TAN समझना क्यों जरूरी है?TAN नंबर से आप यह जांच सकते हैं कि आपकी सैलरी से कटा हुआ टैक्स सही तरीके से सरकार के पास जमा हुआ है या नहीं. TAN की मदद से आपको TDS का क्रेडिट मिलता है. यह आपकी Form 26AS और ITR फाइलिंग में काम आता है, Form 16 पर TAN होना जरूरी होता है, साथ ही इससे सही टैक्स प्लानिंग और रिफंड क्लेम में मदद मिलती है.
इसके लिए आपको इनकम टैक्स पोर्टल पर रजिस्टर होने की जरूरत नहीं है. आप बिना लॉग-इन किए 'Know TAN Details' ऑप्शन में जाकर सिर्फ PAN डालकर TAN की जानकारी देख सकते हैं.
अगर एम्प्लॉयर के पास TAN न हो तो?कानून के मुताबिक, एम्प्लॉयर को TAN लेना और TDS डिपॉजिट करना जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया गया तो इनकम टैक्स एक्ट के तहत पेनल्टी लग सकती है. अगर आपकी सैलरी टैक्स के दायरे में आती है और TDS नहीं कटा है, तो आपको खुद से Self-Assessment Tax भरना पड़ सकता है.
यानी सैलरी स्लिप में लिखा TAN नंबर सिर्फ एक कोड नहीं है, बल्कि यह आपके टैक्स रिकॉर्ड की चाबी है. इसे समझकर आप अपने टैक्स, TDS और ITR से जुड़ी परेशानियों से बच सकते हैं. इसलिए अगली बार सैलरी स्लिप देखें, तो TAN को नजरअंदाज न करें.














