New Labour Codes: देश में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है. बता दें कि अब नौकरी छोड़ने या छूटने के बाद कर्मचारियों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नए लेबर नियम के अनुसार, अब कंपनियों को कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल (FnF) सेटलमेंट सिर्फ 2 वर्किंग दिनों के अंदर करना होगा. यानी अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, उसे निकाल दिया जाता है या कंपनी बंद हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में कंपनी को उसका पूरा बकाया पैसा दो दिन के अंदर देना जरूरी होगा.
अब तक ज्यादातर कंपनियों में यह प्रोसेस काफी लंबा होता था. कर्मचारियों को अपने पैसे के लिए 30 से 45 दिन और कई बार 90 दिन तक इंतजार करना पड़ता था. इससे लोगों को रोजमर्रा के खर्च जैसे किराया, बिल और अन्य जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत होती थी. हालांकि, नए नियम के लागू होने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं.
क्या होता है फुल एंड फाइनल सेटलमेंट?
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट का मतलब है कि कर्मचारी को नौकरी खत्म होने पर मिलने वाली सभी रकम का पूरा हिसाब करके भुगतान करना. इसमें सिर्फ सैलरी ही नहीं, बल्कि कई अन्य चीजें भी शामिल होती हैं. जैसे-
- आखिरी महीने की सैलरी (काम किए गए दिनों के अनुसार)
- बची हुई छुट्टियों का पैसा
- परफॉर्मेंस के आधार पर मिलने वाला बोनस या इंसेंटिव
- ऑफिस से जुड़े खर्चों का रिइम्बर्समेंट (जैसे यात्रा खर्च)
- टैक्स, एडवांस सैलरी, लोन या कंपनी के सामान की कटौती
हालांकि, कुछ खास परिस्थितियों में यह सेटलमेंट 1 महीने तक भी जा सकता है, लेकिन सामान्य मामलों में 2 दिन का नियम ही लागू रहेगा.
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ग्रेच्युटी को लेकर भी बड़ा बदलावनए लेबर कोड में ग्रेच्युटी को लेकर भी राहत दी गई है. पहले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक नौकरी करनी होती थी, लेकिन अब सिर्फ 1 साल की सेवा के बाद भी इसका लाभ मिल सकेगा. कंपनी को यह भुगतान 30 दिनों के अंदर करना होगा.
इस तरह यह नया नियम कर्मचारियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे नौकरी बदलने के समय आर्थिक दबाव कम होगा और लोगों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा.














