Census In UP: जनगणना में गलत जानकारी देने या सहयोग से इनकार पर हो सकती है सजा, जानें सारे नियम

Census of India Act के अनुसार, उम्र, पेशा, आय या परिवार के सदस्यों के बारे में गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

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जनगणना
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Census In UP: उत्तर प्रदेश की अगली जनगणना (2021) 2025-2026 तक स्थगित हो गई थी और अब मई 2026 में इसके शुरू होने की संभावना है, जिसमें 7 मई से 21 मई के बीच ऑनलाइन स्व-गणना (self-enumeration) की सुविधा मिलेगी. पहली बार डिजिटल जनगणना में लोगों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने का मौका मिलेगा, लेकिन इस जनगणना को लेकर कुछ सख्त नियम भी हैं, जिसमें गलत जानकारी देना या सवालों का जवाब देने से इनकार करना दंडनीय अपराध है. इसके अलावा जनगणना में सरकारी कर्मचारी अगर अपनी ड्यूटी में लापरवाही करते हैं, तो उनके खिलाफ भी सजा का प्रावधान है.

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2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की जनसंख्या 19.98 करोड़ थी, जो अब अनुमानित 24.63 करोड़ से अधिक है, जो इसे भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य बनाता है. चलिए आपको बताते है गलत जानकारी देने या सहयोग से इनकार करने पर कितनी सजा हो सकती है और इसके क्या नियम हैं.

कानून के तहत क्या नियम हैं?

Census of India Act के अनुसार, उम्र, पेशा, आय या परिवार के सदस्यों के बारे में गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. जनगणना अधिकारी को जानकारी न देना या उन्हें कार्य करने से रोकना भी अपराध की श्रेणी में आता है. इस बार जनगणना डिजिटल रूप से होगी, इसलिए मोबाइल ऐप पर भी सही जानकारी देना अनिवार्य है. इसके अलावा किसी भी सरकारी कर्मचारी को अगर जनगणना में मदद करने के लिए कहा जाता है, तो उसे यह काम करना ही होगा.

जनगणना के नियम और सजा के प्रावधान

सजा और जुर्माना- जनगणना के सवालों का गलत जवाब देने या जानकारी छिपाने पर 1000 रुपये तक का जुर्माना या 3 साल तक की कैद हो सकती है.

असहयोग पर सजा- यदि कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी के काम में बाधा डालता है या सहयोग करने से मना करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

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कर्मचारियों के लिए नियम- जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी 3 साल की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

डिजिटल प्रक्रिया- इस बार डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से रियल-टाइम में अपडेट किया जाएगा.

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चरण- जनगणना दो चरणों में होगी, जिसमें पहले चरण में मकान सूचीकरण और दूसरे में जनसांख्यिकी डेटा (उम्र, पेशा, धर्म आदि) की जानकारी ली जाएगी.

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