टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय धारावाहिकों में से एक रामायण में कई ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने अपने किरदारों को अमर बना दिया. इन्हीं में से एक थे नलिन दवे, जिन्होंने कुंभकर्ण का रोल निभाकर दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी. उनकी दमदार एक्टिंग का असर ऐसा था कि लॉकडाउन के दौरान जब शो दोबारा प्रसारित हुआ, तो कुंभकर्ण के वध का दृश्य देख लोग भावुक हो उठे. अफसोस की बात यह है कि इतनी लोकप्रियता पाने वाले नलिन दवे आज इस दुनिया में नहीं हैं और महज 50 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था.
कुंभकर्ण बनकर मिली अलग पहचान

नलिन दवे मूल रूप से गुजराती फिल्म इंडस्ट्री और थिएटर से जुड़े हुए थे. उन्होंने कई फिल्मों और नाटकों में काम किया, लेकिन जो पहचान उन्हें कुंभकर्ण के किरदार से मिली, वह किसी और प्रोजेक्ट से नहीं मिल सकी. उनके मजबूत शरीर और भारी आवाज ने इस किरदार को जीवंत बना दिया. ‘कुंभकर्ण' सिर्फ एक राक्षस नहीं बल्कि समझदार और सच्चाई बोलने वाला भाई भी दिखाया गया, जिसने रावण को कई बार समझाने की कोशिश की. यही वजह रही कि दर्शकों ने इस किरदार को दिल से अपनाया और आज भी उसे याद करते हैं.
ऐसे शूट हुआ था कुंभकर्ण का वध सीन

रामानंद सागर के निर्देशन में बने इस शो में उस दौर की सीमित तकनीक के बावजूद कमाल के इफेक्ट्स दिखाए गए. लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने खुलासा किया था कि कुंभकर्ण के वध वाले सीन में क्रोमा तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. शरीर के अलग-अलग हिस्सों को दिखाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस से हाथ, सिर और धड़ के मोल्ड तैयार किए गए थे. जब तीर लगने का दृश्य फिल्माया गया, तो ये मोल्ड अलग-अलग गिरते हुए दिखाए गए. सिर काटने के सीन के लिए पानी के टैंक और क्रोमा इफेक्ट का सहारा लिया गया. सीमित संसाधनों के बावजूद इस सीन को इतनी बारीकी से शूट किया गया कि आज भी यह दृश्य दर्शकों को भावुक कर देता है.
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