रामायणम् इन दिनों हर तरफ चर्चा में है और इसकी कास्ट से लेकर फीस तक हर अपडेट लोगों का ध्यान खींच रही है. लेकिन जैसे ही नई रामायण की बात होती है, लोगों के मन में 90 के दशक की वो तस्वीर खुद-ब-खुद आ जाती है, जब अरुण गोविल राम के रूप में नजर आए थे और अरविंद त्रिवेदी का रावण लोगों के दिलों में डर बनकर बस गया था. उस समय ना करोड़ों का बजट था और ना हाईटेक VFX, फिर भी किरदार इतने दमदार थे कि लोग उन्हें असली मान बैठते थे. आज जब करोड़ों की फीस सामने आ रही है, तो पुरानी और नई रामायण के बीच का फर्क और भी ज्यादा चौंकाने वाला लगता है.
जब राम बने आस्था और रावण बना खौफ

रामानंद सागर की रामायण में अरुण गोविल को लोग सच में भगवान राम मानने लगे थे. वहीं अरविंद त्रिवेदी का रावण इतना प्रभावशाली था कि लोग उन्हें देखकर डर जाते थे. उनके डायलॉग बोलने का अंदाज और चेहरे के हाव-भाव ने रावण को सिर्फ खलनायक नहीं बल्कि यादगार किरदार बना दिया था.
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30 लाख वाला रावण vs 100 करोड़ वाला रावण

अरविंद त्रिवेदी को पूरी रामायण के लिए करीब 30 लाख रुपये फीस मिली थी. वहीं उस समय के सबसे महंगे कलाकार अरुण गोविल को करीब 40 लाख रुपये दिए गए थे. अब नई रामायणम् में रणबीर कपूर को राम के रोल के लिए 150 करोड़ रुपये मिल रहे हैं और रावण बने यश को करीब 100 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं. ये फर्क लोगों को हैरान कर रहा है.
तब भी रावण पीछे, आज भी वही कहानी

दिलचस्प बात ये है कि पहले भी रावण की फीस राम से कम थी और आज भी यही स्थिति बनी हुई है. फर्क सिर्फ इतना है कि पहले लाखों का अंतर था और आज करोड़ों का हो गया है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोग इसे नाइंसाफी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि असली असर तो पुराने रावण का ही था.
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बजट में भी जमीन-आसमान का फर्क

अगर बजट की बात करें तो फर्क और भी चौंकाने वाला है. 80 के दशक में बनी रामानंद सागर की रामायण का कुल बजट करीब 7 करोड़ रुपये था, जिसमें पूरी सीरीज तैयार हुई थी. वहीं अब नई रामायणम् का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. यानि आज सिर्फ एक फिल्म के लिए उतना पैसा खर्च हो रहा है, जितने में पहले पूरी रामायण बन गई थी. ये दिखाता है कि समय के साथ ना सिर्फ फीस बल्कि पूरी इंडस्ट्री का पैमाना ही बदल चुका है.
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