बीआर चोपड़ा का महाभारत टीवी पर अक्टूबर 1988 में टेलीकास्ट होना शुरू हुआ था. उस दौर में ये सबसे पॉपुलर शो था. इसे देखने के लिए लोग सारा कामकाज छोड़ टीवी स्क्रीन के आगे बैठ जाया करते थे. शो के हर किरदार को पसंद किया गया था. 'महाभारत' में दुर्योधन का किरदार निभाने वाले एक्टर पुनीत इस्सर को भी दर्शकों से खूब प्यार मिला था. उनकी एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई थी. हालांकि उस दौर में इस तरह का शो शूट करना आसान नहीं था. खुद पुनीत इस्सर ने इस बारे में बात की है. पुनीत ने बताया कि द्रौपदी के चीर हरण वाला सीन कितना मुश्किल था.
एक न्यूज डेली को दिए इंटरव्यू में पुनीत इस्सर बताया कि 1988 में 'महाभारत' की शूटिंग करना आज जितना आसान नहीं था. VFX टेक्नोलॉजी की वजह से, बड़े-बड़े फाइट सीन और द्रौपदी के चीर हरण वाले सीन की शूटिंग करना अब आसान हो गया है. लेकिन, 1988 में ऐसा नहीं था. पुनीत ने बताया कि 38 साल पहले द्रौपदी के चीर हरण वाला सीन कैसे शूट किया गया था.
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द्रौपदी के चीर हरण वाला सीन कैसे शूट हुआ था?
पुनीत इस्सर ने याद करते हुए बताया कि 1988 में, BR चोपड़ा ने इस सीन को शूट करने से पहले एक मिल से संपर्क किया था. मिल से इस सीन की शूटिंग के लिए सैकड़ों मीटर कपड़ा मांगा गया था. इसके अलावा, यह खास तौर पर कहा गया था कि कपड़े के रंग या बनावट में कोई भी बदलाव दिखाई नहीं देना चाहिए. पुनीत ने कहा कि, VFX टेक्नोलॉजी की मदद से, कपड़े की एक कभी न खत्म होने वाली सप्लाई दिखाना आसान हो गया है, जिसने द्रौपदी की इज्जत बचाई थी. लेकिन, 1988 में टेक्नोलॉजी की कमी की वजह से चीजें अलग तरीके से की जाती थीं.
महाभारत का रोंगटे खड़े करने वाला सीन
द्रौपदी का चीर हरण वाला सीन 'महाभारत' शो के सबसे असरदार सीन्स में से एक है. इस सीन में, द्रौपदी को दरबार में मौजूद सभी लोगों के सामने उसकी साड़ी उतारकर बेइज्जत किया जाता है. लेकिन, द्रौपदी भगवान कृष्ण से प्रार्थना करती है, जो पूरे दरबार के सामने उसकी इज्जत बचाते हैं.
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कलाकारों के लिए बड़ा चैलेंज
पुनीत इस्सर ने बताया कि कलाकारों को सारे एक्शन सीन असल में खुद ही करने पड़ते थे. उस समय केबल का इस्तेमाल नहीं होता था, इसलिए उन्हें खुद ही कूदना पड़ता था. उस समय कोई 'स्टंट डबल' भी नहीं होता था, इसलिए सेट पर चोट लगना आम बात थी. उन्होंने याद करते हुए बताया कि महाभारत के कई कलाकारों को उड़ते हुए तीरों की वजह से आंखों में चोट लग गई थी.
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