टीवी एक्टर हर्षद चोपड़ा 'लॉक अप' सीजन 2 में अपने अतीत से जुड़ी एक बेहद पर्सनल और हैरान करने वाली दुखद घटना शेयर की. इस बारे में बात करते हुए हर्षद खुद काफी इमोशनल हो गए. बता दें कि हर्षद ने इससे पहले कभी इस बारे में पब्लिकली बात नहीं की थी. शो के होस्ट फराह खान और रितेश देशमुख के साथ दिल से हुई बातचीत में एक्टर ने बताया कि 20s की शुरुआत में हुए एक दर्दनाक ब्रेकअप के कारण उन्होंने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी, जिससे उनके शरीर पर ऐसे निशान रह गए जो उन्हें आज भी उस मुश्किल समय की याद दिलाते हैं.
यह बातचीत तब हुई जब हर्षद बॉटम तीन कंटेस्टेंट्स में आ गए और शो से बाहर होने से बचने के लिए अपनी लाइफलाइन का इस्तेमाल किया. अपनी जिंदगी के सबसे बुरे दौर को याद करते हुए, एक्टर ने उस दिल टूटने के दर्द, पछतावे और उस जीवन-सबक के बारे में ईमानदारी से बात की जिसे उन्होंने तब से अपने साथ रखा है.
23 की उम्र में की थी खुद की जान लेने की कोशिश
हर्षद ने बताया कि उस वक्त वह 23 साल के थे और हाल ही में मुंबई आए थे. वह अपने पहले सीरियस रिलेशनशिप में थे जो लगभग 8 से 9 महीने तक चला. एक दिन उनकी गर्लफ्रेंड ने फोन किया और बताया कि उसने उन्हें धोखा दिया है. उसने कहा कि उसने ऐसा उन्हें जलन महसूस कराने के लिए किया था. इस बातचीत ने उन्हें बुरी तरह तोड़ दिया और उस गहरे दुख के पल में उन्होंने खुद को नुकसान पहुंचा लिया. हर्षद ने बताया कि उन्होंने अपना हाथ काट लिया था.
उस दिन को याद करते हुए हर्षद ने कहा, "निशान अभी भी हैं. उसके बाद कुछ नहीं हुआ. मैं उठा और घबराने लगा. मेरे पैर में पहले ही चोट लग चुकी थी, इसलिए मैं मुश्किल से चल पा रहा था." घायल पैर के बावजूद, वह किसी तरह पास के अस्पताल पहुंचने में कामयाब रहे. लेकिन मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई. डॉक्टरों ने उनसे कहा कि उन्हें पुलिस को खबर देनी होगी जिससे वह बुरी तरह डर गए.
उस डरावने पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने उनसे बहुत मिन्नतें कीं, गुहार लगाई, और आखिरकार उन्हें बात समझ आ गई. फिर मैंने वादा किया कि मैं कभी खुद को नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा."
हर्षद का कहना है कि वह इमोशनल दर्द पर अपने फिजिकल पेन को हावी करना चाहते थे. अपनी जिंदगी के उस दौर को याद करते हुए हर्षद ने कहा कि वह उस दर्द को शारीरिक दर्द से बदलकर उसे कम करने की कोशिश कर रहे थे. आज, वह उस फैसले को पछतावे के साथ देखते हैं और कहते हैं कि इसने मुश्किल पलों से निपटने के उनके तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है.
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उन्होंने कहा, "मैं इतना ज्यादा दर्द महसूस करना चाहता था कि उसके सामने यह दर्द कुछ भी न लगे. अब जब भी मैं ऐसे हालात में होता हूं तो खुद को याद दिलाता हूं कि ऐसा कभी दोबारा नहीं करना है." हर्षद ने यह भी बताया कि उस समय वह मुंबई में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. कम उम्र, अकेले रहना और भावनाओं में बह जाना इन वजहों से उन्हें उस काम की गंभीरता का पूरी तरह अंदाजा नहीं था. उन्होंने यह पूरी घटना किसी को नहीं बताई, यहां तक कि अपने पिता को भी नहीं.
"यह राज किसी को नहीं पता, मेरे पिता को भी नहीं. मैं यहां अकेला रहता था. मुझे इसके नतीजों का पता नहीं था. अगर मैं इसमें मर जाता तो ठीक था, लेकिन मैं बच गया और एक अलग तरह का डर पैदा हो गया. मुझे बस जीना था. वह वापस आ गई और हम आगे बढ़ गए. मैं नासमझ था. यह बेवकूफी थी," हर्षद ने कहा.
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