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180 किताबें पढ़ने और 9 साल की रिसर्च के बाद बना था दूरदर्शन का ये शो, पहले किया गया रिजेक्ट, फिर पॉपुलैरिटी के कारण बढ़ाने पड़े एपिसोड

दूरदर्शन के एक शो को बनने से पहले 180 किताबों का अध्ययन किया गया और करीब 9 साल तक रिसर्च चली. दिलचस्प बात ये है कि शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को रिजेक्ट कर दिया गया था. लेकिन प्रसारण के बाद ये दर्शकों को इतना पसंद आया कि इसके एपिसोड्स बढ़ाने पड़ गए थे.

180 किताबें पढ़ने और 9 साल की रिसर्च के बाद बना था दूरदर्शन का ये शो, पहले किया गया रिजेक्ट, फिर पॉपुलैरिटी के कारण बढ़ाने पड़े एपिसोड
दूरदर्शन का ये शो 180 किताबों की रिसर्च से बना था
नई दिल्ली:

90 के दशक में दूरदर्शन पर एक ऐसा ऐतिहासिक धारावाहिक आया था. जिसने दर्शकों को सिर्फ एंटरटेन ही नहीं किया, बल्कि भारत के प्राचीन इतिहास और राजनीति को समझने का नया नजरिया भी दिया. कहा जाता है कि मेकर्स के लिए शो बनाना इतना आसान नहीं था. ऐतिहासिक केरेक्टर को समझने के लिए उन्हें 180 किताबें पढ़ना पढ़ीं. और लगभग 9 साल तक रिसर्च की. दिलचस्प बात ये है कि इतनी मेहनत के बावजूद शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली थी. लेकिन जब ये टीवी पर आया तो इसे इतना पसंद किया गया कि मेकर्स को इसके एपिसोड की संख्या तक बढ़ानी पड़ी. आज भी इसे भारतीय टेलीविजन के सबसे बेहतरीन ऐतिहासिक शोज में गिना जाता है.

रिजेक्ट होने के बाद मिली मंजूरी

हम बात कर रहे हैं दूरदर्शन के मशहूर ऐतिहासिक धारावाहिक 'चाणक्य' की. इस शो को लेखक और निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने बनाया था. उन्होंने इसके लिए करीब 180 किताबों को गहराई से पढ़ा और लगभग 9 साल तक लगातार रिसर्च की. उनका मकसद सिर्फ एक कहानी दिखाना नहीं था. बल्कि चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के भारत की पॉलिटिक्स, सोसाइटी और कल्चर को भी पर्दे पर सच्चाई के साथ उतारना था. हालांकि शुरुआत में दूरदर्शन ने इस प्रोजेक्ट को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाया और इसे मंजूरी मिलने में समय लगा. 8 सितंबर 1991 को बमुश्किल इसका प्रसारण शुरू हुआ. तब दर्शकों ने इसे हाथोंहाथ लिया. इसकी कहानी, डायलोग और ऐतिहासिक घटनाओं की प्रेजेंटेशन लोगों को इतना पसंद आया कि ये जल्द ही देश के सबसे पसंद किए जाने वाले शो में शामिल हो गया.

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डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने खुद इस शो में चाणक्य की भूमिका निभाई. उन्होंने विष्णुगुप्त के बचपन से लेकर चंद्रगुप्त मौर्य के राज्याभिषेक तक की यात्रा को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया. 

पॉपुलैरिटी ऐसी कि बढ़ाने पड़े एपिसोड

शुरुआत में इस ऐतिहासिक शो के लिए सीमित एपिसोड की योजना बनाई गई थी, लेकिन दर्शकों के जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद इसके एपिसोड बढ़ा दिए गए. और, आखिरकार ये 47 एपिसोड तक पहुंच गया. 8 सितंबर 1991 से 9 अगस्त 1992 तक दूरदर्शन पर आए इस शो ने उस दौर में पॉपुलेरिटी के नए रिकॉर्ड बनाए. 'चाणक्य' को उसके फेक्चुअल प्रेजेंटेशन, दमदार एक्टिंग और आलीशान पेशकश के चलते खूब पसंद किया गया. इसे पांच अप्ट्रॉन अवॉर्ड भी मिले और कई देशों में इसे दिखाया गया किया गया. खास बात ये रही कि तीन दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ये शो इतिहास प्रेमियों और टीवी दर्शकों के बीच उतना ही पॉपुलर बना हुआ है.

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