Rajiv Gandhi Assassination Case: भारत के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में नया मोड़ आया है. इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए ए जी पेरारिवलन ने अब कानूनी पेशे में कदम रख लिया है. तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में उनका वकील के रूप में पंजीकरण हो गया है. 31 वर्ष तक जेल में रहने और 2022 में सुप्रीम कोर्ट से रिहाई के बाद पेरारिवलन का यह फैसला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक बहस को भी जन्म दे रहा है.
बार एसोसिएशन में हुआ पंजीकरण
राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों में से एक ए जी पेरारिवलन (54) ने 27 अप्रैल को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार एसोसिएशन में वकील के रूप में अपना नाम दर्ज कराया. इसके साथ ही वे आधिकारिक रूप से वकालत के पेशे से जुड़ गए हैं. पेरारिवलन अब मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करेंगे.
Rajiv Gandhi Assassination Case: राजीव गांधी हत्या मामले के दोषी ने वकील के रूप में पंजीकरण कराया
कैदियों की कानूनी मदद पर रहेगा फोकस
पेरारिवलन के वकील बनने के पीछे उद्देश्य भी सामने आया है. बताया गया है कि वे मुख्य रूप से जेल में बंद कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे. लंबे समय तक जेल में रहने के अनुभव के चलते वे कैदियों की समस्याओं और न्याय तक पहुंच की चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं.
औपचारिक समारोह में शामिल हुए न्यायाधीश
सोमवार को पेरारिवलन का औपचारिक रूप से बार एसोसिएशन में स्वागत किया गया. इस मौके पर मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी मौजूद रहे. तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के अध्यक्ष पी.एस. अमलराज और उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरण भी समारोह में शामिल हुए.
कानूनी प्रक्रिया पूरी, शपथ दिलाई गई
वरिष्ठ वकील सी.के. चंद्रशेखर ने पेरारिवलन के पंजीकरण का प्रस्ताव पेश किया, जबकि बार काउंसिल की पंजीकरण समिति के अध्यक्ष के. बालू ने उन्हें वकील की शपथ दिलाई. इसके साथ ही पेरारिवलन की वकालत की औपचारिक शुरुआत हो गई.
31 साल जेल, फिर सुप्रीम कोर्ट से रिहाई
गौरतलब है कि ए जी पेरारिवलन को राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. उन्होंने लगभग 31 वर्ष जेल में बिताए. सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2022 को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया था.
राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर घटनाक्रम
संयोग से यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हुए आत्मघाती हमले में मारे गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि भी मनाई जा रही है. पेरारिवलन के वकील बनने की खबर ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
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