ऊंट का खून खत्म कर देगा सांप के जहर का असर, वैज्ञान‍िकों की खोज से रुक जाएंगी मौतें

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर की एमआरयू यूनिट पिछले 15 वर्षों से सर्प विष पर शोध कर रही है, इस दौरान 65 से अधिक बीमारियों पर रिसर्च पूरी की जा चुकी है.

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वैज्ञानिकों ने ऊंट के खून से एंटी स्नेक वेनम तैयार किया है.

बीकानेर में सर्पदंश के इलाज के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और एम्स जोधपुर की संयुक्त टीम ने ऊंट के खून से एंटी-स्नेक वेनम तैयार करने में कामयाबी पाई है. यह उपलब्धि खास तौर पर ग्रामीण भारत के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है, जहां हर साल हजारों लोग सर्पदंश का शिकार बनते हैं.

भारत में हर साल 50 हजार सर्पदंश से मौत

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में हर वर्ष करीब 50 हजार लोगों की मौत सर्पदंश के कारण होती है, इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित किसान और खेतों में काम करने वाले मजदूर होते हैं. अभी तक सर्पदंश के इलाज में जो एंटी-स्नेक वेनम इस्तेमाल किया जाता है, वह घोड़े के खून से तैयार होता है, जिससे कई बार मरीजों में एलर्जी और गंभीर रिएक्शन देखने को मिलते हैं, इसी समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने ऊंट के खून पर आधारित एंटी-स्नेक वेनम पर काम शुरू किया.

जहर को निष्क्रिय कर सकती है 

यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. संजय कौचर बताते हैं कि ऊंट के शरीर में मौजूद विशेष एंटीबॉडी सर्प विष को ज्यादा प्रभावी तरीके से निष्क्रिय कर सकती है, जिससे दुष्प्रभावों की आशंका कम हो जाती है.

सांप का जहर ऊंट के शरीर में डाला गया 

शोध के तहत नियंत्रित मात्रा में सांप का जहर ऊंट के शरीर में डाला गया, और फिर उसके खून से एंटी-स्नेक वेनम तैयार की गई. इस दवा का सफल परीक्षण चूहों पर किया गया. जहां किसी भी तरह के गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आए. इन सकारात्मक नतीजों के बाद अब मानव पर क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी गई है.

हजारों जानें बच सकती हैं 

यह पूरा शोध विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्री-क्लिनिकल मानकों के अनुरूप किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानव परीक्षण भी सफल रहे, तो ऊंट के खून से बनी यह एंटी-स्नेक वेनम सर्पदंश के इलाज में एक सुरक्षित सस्ती और प्रभावी विकल्प बन सकती है, और आने वाले समय में हजारों जानें बचाने में अहम भूमिका निभाएगी.

बीकानेर से ग‍िर‍िराज भादाणी की र‍िपोर्ट...

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