- महाराष्ट्र सरकार लगभग 65 लाख अपात्र लाड़ली बहनों से राशि वापस लेने की तैयारी कर रही है
- योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह पंद्रह सौ रुपए दिए जाते हैं और कुल बजट लगभग छब्बीस हजार करोड़ रुपए है
- पात्रता के लिए परिवार की सालाना इनकम 2.50 लाख से कम होनी चाहिए, कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए
महाराष्ट्र सरकार लगभग 65 लाख अपात्र लाभार्थियों “लाड़ली बहनों” से योजना के तहत दी गई राशि वापस लेने की तैयारी कर रही है. वर्तमान में चल रही सत्यापन यानी वेरिफिकेशन प्रक्रिया की वजह से मार्च और अप्रैल महीने की किस्तें अभी तक वितरित नहीं की गई हैं. अब जबकि मई महीने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि सरकार मई के अंत तक या जून में पिछले दो-तीन महीनों की किस्तें एक साथ जारी कर सकती है.
जांच अभियान के दौरान करीब 65 लाख ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गई है जो योजना के मानदंडों पर खरे नहीं उतरते. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अब मुख्य उद्देश्य इन अपात्र लाभार्थियों से भुगतान की गई राशि की वसूली करना है, जहां भी तकनीकी रूप से यह संभव हो सके.सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिले जो वास्तव में पात्र हैं, ताकि सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.
क्यों और किसके नाम कटे?
- मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना परिवारों के लिए है जिनकी इनकम सालाना 2.5 लाख रुपये से कम है. लेकिन कई आवेदक इसमें फिट नहीं हैं.
- नियम के मुताबिक आवेदक या उसके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए.
- कई महिलाओं ने फॉर्म भरते समय गलती से खुद को सरकारी कर्मचारी बता दिया. इस वजह से उनका आवेदन रद्द हो गया.
- वेरिफिकेशन की डेडलाइन 30 अप्रैल थी. लेकिन इस तारीख तक लाखों महिलाओं ने अपना ई-केवाईसी पूरा ही नहीं किया.
प्रतिमाह दिए जा रहे 1,500 रुपए
बता दें कि लाड़की बहना योजना महाराष्ट्र सरकार की अहम योजनाओं में से एक है. इस योजना के लिए सरकार ने लगभग 26,000 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है. अगस्त 2024 से चल रही इस योजना के तहत हर लाभार्थी महिला को प्रतिमाह 1,500 रुपए दिए जा रहे हैं.
अपात्र बहनों को वापस करना होगा पैसा
महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना सरकार ने जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक मदद देने के मकसद से शुरू की है. लेकिन बहुत से अपात्र लोग भी इसका फायदा ले रहे थे. अब इसे लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं. लाखों नाम काट दिए गए हैं. सरकार अब इन अपात्र बहनों से भुगतान की गई राशि वापस लेने जा रही है. बता दें कि करीब 65 लाख महिलाओं के नाम लिस्ट से काटे गए थे.
2.43 करोड़ में से 1.89 करोड़ महिलाएं ही पात्र
ई-केवाईसी के बाद लाभार्थियों की लिस्ट अपडेट हो चुकी है. जिसके बाद कुल रजिस्टर्ड महिलाओं में से करब 54 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है. अब इन बहनों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जानकारी के मुताबिक, जब योजना शुरू हुई थी तब 2.43 करोड़ से ज्यादा महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था. लेकिन केवाईसी के बाद पात्र लाभार्थी घटकर 1.89 करोड़ रह गए. सरकार ने यह कदम जरूरतमंदों तक पैसा पहुंचने की वजह से उठाया है.
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