- बीएमसी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस ने भाजपा और मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
- कांग्रेस ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के साथ कथित सट्टेबाज सोनू जालान की तस्वीर साझा कर सवाल उठाए हैं.
- सोनू जालान पर मकोका जैसे कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हुई है और वह सट्टेबाजी के अपराधों में संलिप्त रहा है.
मुंबई महानगरपालिका चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई. सभी प्रमुख राजनीतिक दल आखिरी मौके पर एक-दूसरे पर तीखे हमले करते नजर आए. इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप, कटाक्ष और पुराने विवादों को चुनावी हथियार बनाकर मतदाताओं को साधने की कोशिश की गई. इसी कड़ी में कांग्रेस ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनावी माहौल को और गरमा दिया है. कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सचिन सावंत ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में भाजपा और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा को निशाने पर लिया है.
सचिन सावंत ने एक तस्वीर साझा की है और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के साथ सोनू जालान नामक व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं. कांग्रेस का दावा है कि तस्वीर में दिखाई देने वाला सोनू जलान वही व्यक्ति है जिसे देश के बड़े सट्टेबाजों में गिना जाता रहा है और जिस पर मकोका जैसे कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई हो चुकी है.
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राजनीति ही नहीं, नैतिकता पर भी उठाया सवाल
सचिन सावंत ने अपनी पोस्ट में भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि अब भाजपा चुनाव जीतने के लिए ऐसे लोगों का भी सहारा ले रही है, जिनका नाम अपराध और सट्टेबाजी से जुड़ा रहा है.
कांग्रेस नेता ने इसे न सिर्फ राजनीति बल्कि नैतिकता का भी गंभीर सवाल बताया है और भाजपा से इस तस्वीर को लेकर जवाब देने की मांग की है.
कौन है सोनू जालान? जानिए पूरा बैकग्राउंड
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनू जालान लंबे समय तक भारत के कुख्यात सट्टा नेटवर्क का एक अहम चेहरा रहा है. बताया जाता है कि वह पिछले एक दशक से अधिक समय तक भारत और विदेशों में सट्टेबाजी का बड़ा रैकेट चला रहा था.
- रिपोर्ट के मुताबिक, सोनू जालान ने अपने करियर की शुरुआत ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स के व्यापार से की थी. इसके बाद उसने सट्टेबाजी की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे बड़े बुकी नेटवर्क से जुड़ता चला गया. वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, दुबई और श्रीलंका जैसे देशों में भी सट्टेबाजी के संचालन में सक्रिय बताया गया है.
- जांच के दौरान पुलिस को उसके संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके करीबी सहयोगियों से होने के संकेत भी मिले थे.
- उसका नाम कई बार बड़े बुकी, हाई-प्रोफाइल नेटवर्क और यहां तक कि बॉलीवुड से जुड़े कुछ लोगों के संपर्कों में भी सामने आया था.
- इन्हीं वजहों से सोनू जालान का नाम हमेशा विवादों और आपराधिक गतिविधियों से जोड़कर देखा गया है.
भाजपा पर नैतिकता और जवाबदेही का दबाव
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन इस तरह की तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस इसे भाजपा की “असली राजनीति” करार दे रही है, वहीं भाजपा की ओर से अब तक इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इस विवाद पर अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) भी खुलकर मैदान में उतर आई है. पार्टी के नेता आनंद दुबे ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
मकोका आरोपी मंत्री के साथ क्या कर रहा था?: दुबे
आनंद दुबे ने कहा, “अगर ये सब सही है कि कुख्यात बुकी सोनू जालान, जिसे मकोका जैसे कड़े कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया था, मुंबई के पालक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के साथ मौजूद था तो यह बेहद गंभीर मामला है. आखिर एक मकोका आरोपी मंत्री के साथ क्या कर रहा था?” उन्होंने आगे सवाल उठाया, “क्या सोनू जालान अब भाजपा में शामिल हो गया है, क्योंकि उसे खुले तौर पर लोढ़ा के साथ कैंपेन करते देखा जा सकता है? या फिर मंत्री लोढ़ा ने निजी तौर पर उससे समर्थन मांगा था?”
आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि सत्ता की राजनीति अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा, "आज हालात ऐसे हैं कि सत्ता के लिए सट्टेबाज भी मैदान में उतर आए हैं. यह न सिर्फ राजनीति, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी चिंताजनक संकेत है.”
कांग्रेस के बाद शिवसेना (यूबीटी) की भी तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के बाद शिवसेना (यूबीटी) की इस तीखी प्रतिक्रिया से भाजपा पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब बीएमसी चुनाव का प्रचार अपने अंतिम चरण में है, यह मुद्दा मतदाताओं के मन में सवाल पैदा कर सकता है. विशेषकर शहरी मतदाता वर्ग, जो कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को अहम मानता है, उसके लिए यह विवाद संवेदनशील साबित हो सकता है.
फिलहाल, बीएमसी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यह विवाद मुंबई की सियासत में एक नया मोड़ लेता नजर आ रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस मुद्दे को किस तरह लेते हैं और क्या यह तस्वीर भाजपा की रणनीति पर असर डाल पाती है या नहीं.














