महाराष्ट्र में गरमाई सियासत! BJP- शिवसेना में तकरार की खबरों के बीच शिंदे गुट के नेता के दफ्तर पर पड़ी रेड

यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शहाजीबापू पाटील ने सांगोला चुनाव में गठबंधन सहयोगी BJP को कड़ी चुनौती दी है, जिससे इस कार्रवाई पर राजनीतिक संदेह पैदा हो गया है.

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मुंबई:

महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन के बीच बीते कुछ समय से सबकुछ ठीक नहीं है.सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में BJP और शिवसेना(शिंदे) के बीच अंदरखाने खींचतान जारी है. बीजेपी और शिवसेना(शिंदे) के बीच खींचतान की खबरों को उस वक्त और हवा मिली जब एकनाथ शिंदे गुट के एक नेता के दफ्तर पर रेड पड़ गई. ये रेड सांगोल में शिंदे गुट के विधायक के कार्यालय को लेकर चुनाव आयोग और स्थानीय अपराध शाखा जांच की है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पूर्व विधायक शहाजीबापू पाटील के सांगोला स्थित कार्यालय की चुनाव आयोग के उड़न दस्ता फ्लाइंग स्क्वाड और स्थानीय अपराध शाखा दल द्वारा जांच की गई. 

बताया जा रहा है ये जांच उस समय की गई जब शहाजीबापू पाटील की चुनावी रैली खत्म हुई थी. इसी दौरान पुलिस इस कार्यालय में दाखिल हुई. यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शहाजीबापू पाटील ने सांगोला चुनाव में गठबंधन सहयोगी BJP को कड़ी चुनौती दी है, जिससे इस कार्रवाई पर राजनीतिक संदेह पैदा हो गया है. सांगोला में शिंदे गुट शिवसेना और BJP के बीच के उम्मीदवार आमने-सामने हैं. वैसे बीजेपी ने इस स्थिति को 'मैत्रीपूर्ण संघर्ष' (फ्रेंडली फाइट) बताया है. 

शिवसेना के चुनाव कार्यालय पर हुई रेड को लेकर जब सूबे के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसमें गंभीरता से लेने जैसा कुछ नहीं है. जो जांच होगी वो होगी. इसपर जब रिपोर्टर ने पूछा कि आखिर आप दोनों (सीएम और आप) एक ही जगह पर थे, तो क्या इस दौरान कोई बातचीत हुई क्या, मुलाकात हुई क्या? इस सवाल के जवाब में एकनाथ शिंदे ने कहा कि नहीं, मैं पहले आ गया था. मुख्यमंत्री महोदय बाद में आए थे. हमारी यहाँ पैठण में एक साथ सभा है, और उसी संबंध में हमारी पूरी चर्चा होती रहती है.

जब एकनाथ शिंदे से पूछा गया कि अभी जो आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, क्या उसकी पृष्ठभूमि पर समन्वय के लिए कोई बैठक हो रही है? इसपर एकनाथ शिंदे ने जवाब दिया कि आरोप-प्रत्यारोप मैंने किए हैं, या मुख्यमंत्री ने किए हैं? बिल्कुल नहीं किए. हम यह चुनाव स्थानीय स्तर का है, स्थानीय विषयों को लेकर लड़ रहे हैं. यह कार्यकर्ताओं का चुनाव है, इसलिए यहां राजनीतिक भाषण करने की कोई आवश्यकता नहीं है. लोकसभा, विधानसभा हो या स्थानीय चुनाव, कार्यकर्ताओं की यह अपेक्षा होती है कि उनके नेता आएं, इसलिए हम प्रचार कर रहे हैं. हम विकास के मुद्दे पर प्रचार कर रहे हैं. 

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