अजित पवार के जाने के साथ महाराष्ट्र की राजनीति सिर्फ एक नेता नहीं, एक ठहराव भी खो बैठी. चारों तरफ शोक था, परिवार में सन्नाटा और कार्यकर्ताओं की आंखों में टूटता भरोसा. लेकिन इसी खामोशी के बीच, मुंबई में सत्ता की 'घड़ियां' तेज चलने लगीं. जिस वक्त पवार परिवार अपने दुख को समेटने की कोशिश कर रहा था, उसी वक्त एक बड़ा राजनीतिक फैसला आकार ले रहा था. वो फैसला था सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाने का.
यह फैसला सिर्फ एक पद भरने की कवायद नहीं था, बल्कि उस मोड़ की कहानी है जहां भावनाओं पर राजनीति भारी पड़ी और संभावित पार्टी विलय की बातचीत अचानक सत्ता के रास्ते से अलग हो गई.
30 जनवरी, सुबह- विलय की चर्चा जोरों पर
अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति शोक में थी, लेकिन सियासी गलियारों में एक और चर्चा तेज हो चुकी थी. एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की. एनसीपी (शरद पवार) गुट के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि यह सिर्फ चर्चा नहीं थी, बल्कि तीन-चार महीनों से बातचीत चल रही थी. एकनाथ खडसे, अनिल देशमुख, राजेश टोपे जैसे नेताओं ने खुलकर कहा कि विलय लगभग तय था, सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी था.
यहां तक कहा गया कि अजित पवार की आखिरी इच्छा भी यही थी कि पार्टी एक हो और शरद पवार के जन्मदिन तक यह 'तोहफा' दिया जाए.
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30 जनवरी, दोपहर- अचानक बदला घटनाक्रम
इसी बीच, मुंबई में एक अलग ही हलचल शुरू हुई. एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेताओं- प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए मीटिंग हुई. मीटिंग का एजेंडा साफ था:
विधायक दल का नया नेता कौन होगा?
खाली पड़े डिप्टी सीएम पद का क्या होगा?
यहीं पहली बार सुनेत्रा पवार के नाम पर मुहर लगती दिखी.
अजित पवार के अंतिम संस्कार में पार्थ और जय पवार
30 जनवरी, शाम- सीएम फडणवीस से मुलाकात
छगन भुजबल खुद स्वीकार करते हैं कि वे प्रफुल्ल पटेल और तटकरे के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले. भुजबल का बयान साफ था, 'हमने तय किया है कि विधायक दल के नेता के तौर पर सुनेत्रा पवार का नाम देंगे. डिप्टी सीएम पर भी बात हो गई है.'
यानी शोक के बीच, सत्ता का निर्णय तेजी से आगे बढ़ चुका था.
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30 जनवरी, रात- पवार परिवार अलग, राजनीति अलग
सूत्रों के मुताबिक, जिस समय मुंबई में सियासी फैसले हो रहे थे, पवार परिवार की बैठक में सुनेत्रा पवार शामिल नहीं थीं. सबसे अहम बात ये कि शरद पवार, एनसीपी (SP) नेतृत्व इनमें से किसी को भी सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने की योजना की पूर्व जानकारी नहीं थी.
यहीं से साफ हो गया कि विलय की पटरी से राजनीति उतरकर सीधे सत्ता की कुर्सी पर आ गई है.
31 जनवरी, सुबह- शरद पवार का बड़ा बयान
बारामती में शरद पवार ने दो टूक कहा, 'मुझे सुनेत्रा पवार के नाम की कोई जानकारी नहीं है. अखबार में पढ़ा. यह उनके दल का फैसला होगा.'
उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि फैसले मुंबई में हो रहे हैं, परिवार के बीच नहीं. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि एनडीए में शामिल होने का कोई सवाल नहीं.
अजित पवार की बहन सुप्रिया सुले और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार
31 जनवरी, विलय पर सन्नाटा
जहां एनसीपी (SP) नेता लगातार कह रहे हैं कि विलय लगभग तय था, वहीं अजित पवार गुट इस पर चुप है. सुनील तटकरे और छगन भुजबल का रुख साफ है कि अभी सिर्फ विधायक दल नेता और डिप्टी सीएम पर बात हो रही है.
यानी विलय की कहानी को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.
अब आगे क्या?
सुनेत्रा पवार, जो विधानसभा या विधान परिषद की सदस्य नहीं हैं, विधायक दल की नेता चुनी जाएंगी. इसके बाद उनके महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनने का रास्ता साफ होगा.
अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में सून्य
मालूम हो कि बुधवार को बारामती में हुए प्लेन क्रैश में अजित पवार के साथ-साथ विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई थी. अजित पवार एनसीपी के अध्यक्ष होने के साथ-साथ महाराष्ट्र की महायुति सरकार में डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. अजित के निधन के बाद उनकी राजनैतिक विरासत संभालने के लिए उत्तराधिकारी की तलाश की जा रही थी. उत्तराधिकारियों की लिस्ट में उनकी पत्नी सुनेत्रा का नाम पहले नंबर पर था. कल हुई बैठक में यही फैसला लिया गया. इससे ये साफ है कि पवार परिवार जल्दबाजी को लेकर नाराज है.














