Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र की चर्चित “मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना” (Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आयी है. ई‑केवाईसी पूरी न होने की वजह से सरकार ने करीब 68 लाख लाभार्थियों के खाते अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं. सरकार का कहना है कि इसका मकसद योजना में हो रहे गलत इस्तेमाल को रोकना है. राहत की बात यह है कि जिन महिलाओं की ई‑केवाईसी किसी कारण से पूरी नहीं हो पाई थी, उन्हें अब 30 अप्रैल तक का अतिरिक्त समय दिया गया है. तय समय में प्रक्रिया पूरी करने पर खाते फिर से चालू हो जाएंगे.
Ladki Bahin Yojana: 68 लाख खाते बंद
क्या कहते हैं आंकड़े?
सरकारी जानकारी के मुताबिक, योजना के तहत कुल 2.43 करोड़ खाते थे. ई‑केवाईसी न होने के कारण 68 लाख खाते बंद किए जाने के बाद अब सक्रिय खातों की संख्या करीब 1.75 करोड़ रह गई है. इससे साफ है कि बड़ी संख्या में ऐसे खाते थे, जिनका सत्यापन नहीं हुआ था.
गलत लोगों द्वारा योजना का लाभ लेने की शिकायत
राज्य सरकार को कई शिकायतें मिली थीं कि योजना का लाभ अपात्र लोग भी ले रहे हैं. इनमें पुरुष और कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल बताए गए. शिकायतें मिलने के बाद ही सरकार ने योजना के लाभार्थियों का सत्यापन अभियान शुरू किया और ई‑केवाईसी अनिवार्य कर दी.
हर महीने 3,700 करोड़ रुपये का खर्च
लाडकी बहन योजना के तहत सरकार हर महीने लगभग 3,700 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में भेजती है. इस योजना में हर पात्र महिला को 1,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जाती है. खाते कम होने से सरकार के खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है.
बजट में भी दिखेगा असर
खातों की संख्या घटने के बाद सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा. वित्त वर्ष 2025‑26 में इस योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान था. वहीं 2026‑27 के बजट में इसे घटाकर 26,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, अब सरकार को सालाना करीब 31,500 करोड़ रुपये ही खर्च करने होंगे. इससे करीब 12,240 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कम होने का अंदाजा लगाया जा रहा है.
अपात्रों से वसूली नहीं होगी
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि जांच में जो लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं, उनसे अब तक दी गई राशि वापस नहीं ली जाएगी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भरोसा दिलाया है कि यह योजना बंद नहीं होगी, बल्कि सही लाभार्थियों तक ही पहुंचेगी.
ई‑केवाईसी की समय सीमा पहले भी बढ़ चुकी
सरकार ने बताया कि नवंबर 2025 से अब तक ई‑केवाईसी की समय सीमा कई बार बढ़ाई जा चुकी है. मकसद यही रहा है कि तकनीकी दिक्कत या जानकारी की कमी के कारण कोई भी पात्र महिला योजना से वंचित न रह जाए.
30 अप्रैल तक मौका, फिर खाते होंगे चालू
प्रशासन ने साफ किया है कि जो महिलाएं 30 अप्रैल तक अपनी ई‑केवाईसी पूरी कर लेंगी और बैंक खाते को आधार से लिंक करा लेंगी, उनके खाते दोबारा सक्रिय कर दिए जाएंगे और उन्हें योजना का पैसा फिर मिलने लगेगा.
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया फर्जीवाड़ा रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि योजना की राशि सीधे, सुरक्षित और केवल जरूरतमंद महिलाओं तक ही पहुंचे.
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