- महाराष्ट्र सरकार ने इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच ईंधन आपूर्ति संकट से निपटने के लिए विशेष एहतियात बरत रही है.
- छत्रपति संभाजीनगर में सरकारी और आपातकालीन वाहनों के लिए ईंधन का आरक्षित स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं.
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आम लोगों से घबराहट में खरीदारी नहीं करने की अपील की है.
इजरायल-ईरान संघर्ष के गहराने के साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने संभावित ईंधन आपूर्ति संकट से निपटने के लिए एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. हालांकि राज्य में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहों ने स्थानीय स्तर पर चिंता पैदा की है, लेकिन प्रशासन स्थिति को स्थिर करने में जुटा है. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जैसे जिलों में अधिकारियों ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को पहले ही निर्देश दे दिए हैं कि वे ईंधन का एक निश्चित स्टॉक को विशेष रूप से सरकारी और आपातकालीन वाहनों के लिए आरक्षित रखे. यह 'एहतियाती आरक्षण' इसलिए किया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें.
इस युद्ध का सबसे सीधा असर गैस वितरण प्रणाली पर दिखाई दे रहा है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 5 मार्च 2026 को जारी उच्च-स्तरीय निर्देश के बाद 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है. भारत के 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस के संकट से बचाने के लिए सभी रिफाइनरियों को केवल घरेलू उपयोग के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन (एलपीजी के मुख्य घटक) को प्राथमिकता देने का आदेश दिया गया है. इसके परिणामस्वरूप गैर-घरेलू क्षेत्रों में आपूर्ति की कमी हो गई है, जिसके कारण पुणे जैसे शहरों में गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है.
सरकार की अपील - घबराएं नहीं, ईंधन का तत्काल संकट नहीं
जनता के बीच बढ़ती चिंता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागरिकों से घबराहट में खरीदारी नहीं करने की अपील की है. बजट चर्चा से पहले राज्य को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि महाराष्ट्र में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार 'तेल कूटनीति' का उपयोग कर रही है और गैर-संघर्ष वाले क्षेत्रों से कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. वर्तमान में भारत के पास करीब 50 दिनों का ऊर्जा भंडार सुरक्षित है और सरकारी रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाने के लिए अपने मेंडिनेंस कामों को स्थगित कर दिया है.
आर्थिक प्रभाव? कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, औद्योगिक लागत में वृद्धि
ईंधन की आपूर्ति फिलहाल सरकारी नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसके आर्थिक परिणाम महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्रों में महसूस किए जा रहे हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली करीब 20% वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. महाराष्ट्र के विनिर्माण और रासायनिक हब के लिए इसका मतलब औद्योगिक इनपुट लागत में 10-25% की वृद्धि है. परिवहन क्षेत्र भी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि मार्च की शुरुआत से डीजल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी गई है.
विधानसभा के बजट सत्र में 'ईंधन सुरक्षा' का मुद्दा रह सकता है हावी
महाराष्ट्र विधानसभा में चल रहे बजट पर सत्र में ईंधन की स्थिति मुख्य मुद्दा रहने की संभावना है. हालांकि 2026-27 के बजट में कृषि के लिए सौर परियोजनाओं के जरिए दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन सदन की तत्काल प्राथमिकता मिडिल ईस्ट युद्ध के प्रभाव को संभालना होगा. यदि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महायुति सरकार अतिरिक्त सब्सिडी या राहत उपायों पर चर्चा कर सकती है, जिससे 'युद्ध की तपिश' राज्य की आर्थिक गति को प्रभावित न करे.














