- ईरान-इजरायल युद्ध के कारण महाराष्ट्र का कंडोम निर्माण उद्योग कच्चे माल की कमी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है
- कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और समुद्री मार्गों पर जोखिम के कारण उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत तक कटौती हुई
- महाराष्ट्र में स्थित 6 बड़ी कंपनियां देश के कुल कंडोम उत्पादन का बड़ा हिस्सा बनाती हैं और संकट का केंद्र हैं
ईरान‑इजरायल युद्ध का असर अब भारत के औद्योगिक सेक्टर पर भी दिखने लगा है. महाराष्ट्र का कंडोम निर्माण उद्योग इस वैश्विक संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कच्चे माल की कमी और लागत में भारी बढ़ोतरी के चलते राज्य की प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन में करीब 50 फीसदी तक कटौती कर दी है. भारत की 10 सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनियों में से 6 अकेले महाराष्ट्र में स्थित हैं. युद्ध के कारण समुद्री मार्गों पर बढ़े जोखिम, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे इलाकों में, आयात महंगा हो गया है. इसका सीधा असर कच्चे माल की आपूर्ति और उत्पादन लागत पर पड़ा है.
आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती
कंडोम निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई अहम रसायन और सामग्रियां विदेशों से आयात की जाती हैं. युद्ध के कारण समुद्री रास्तों पर बढ़ते जोखिम और लॉजिस्टिक्स लागत में इजाफे ने मैन्युफैक्चरर्स के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. पिछले कुछ महीनों में इन सामग्रियों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा कोंडम मैन्युफैक्चरिंग हब है, वहां कई यूनिट्स में उत्पादन लगभग आधा हो गया है. इसका असर सीधे तौर पर यहां काम करने वाले करीब 2000 से अधिक कामगारों पर पड़ा है. उत्पादन घटने से शिफ्ट कम हो गई हैं और मजदूरों की आय प्रभावित हो रही है.
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बारामती और संभाजीनगर सबसे ज्यादा प्रभावित
बारामती एमआईडीसी के मैनेजर जितेंद्र चौधरी ने बताया, “लागत दोगुनी हो गई है. 50 फीसदी उत्पादन रोकना पड़ा है. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में कंपनियों पर ताला लगाने की नौबत आ सकती है.” सिर्फ बारामती ही नहीं, बल्कि छत्रपति संभाजीनगर जिला भी इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है. भारत की 10 बड़ी कंडोम निर्माता कंपनियों में से 6 कंपनियां इसी शहर के वालुज औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हैं.
40 देशों में निर्यात करने वाला हब संकट में
छत्रपति संभाजीनगर से दुनिया के करीब 40 देशों यूरोप, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में निर्यात किया जाता है. यहां हर महीने लगभग 100 मिलियन यूनिट्स का उत्पादन होता है. कामसूत्र और नाइट राइडर्स जैसे 50 से ज्यादा नामी ब्रांड्स यहीं बनाए जाते हैं. इस उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 200 से 300 करोड़ रुपये बताया जाता है. युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर आयातित रसायनों पर पड़ा है. कीमतों में बढ़ोतरी इस प्रकार दर्ज की गई है:
- सिलिकॉन ऑयल: 50% तक महंगा
- 3‑लेयर एल्यूमिनियम फॉइल: 35% की बढ़ोतरी
- पैकेजिंग मटेरियल: 15% महंगा
- लेटेक्स: 27% तक महंगा
नए ऑर्डर लेना बंद, पुराने सौदे भी घाटे में
संभाजीनगर स्थित एक कंडोम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के मैनेजर सचिन कुलकर्णी ने बताया, “लागत इतनी बढ़ गई है कि हमने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है. पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करना भी अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है.”
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