'शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से अस्वीकार्य', CM फडणवीस ने इतिहास की व्याख्या पर छेड़ी नई बहस

महाराष्ट्र की राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान अत्यंत भावनात्मक और प्रतीकात्मक है. ऐसे में टीपू सुल्तान के साथ तुलना का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन जाता है. फिलहाल, सीएम फडणवीस के बयान ने विधानसभा के भीतर और बाहर इतिहास की व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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महाराष्ट्र विधानसभा में इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर बहस
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  • सीएम फडणवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा में छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान की तुलना पर कड़ी आपत्ति जताई
  • फडणवीस ने कहा कि शिवाजी महाराज भारतीय स्वाभिमान, राष्ट्रवाद और सुशासन के प्रतीक हैं और उनकी तुलना उचित नहीं है
  • सीएम ने टीपू सुल्तान के शासन के दौरान सांप्रदायिक तनाव और हिंदुओं की हत्याओं के दावों पर चर्चा की जरूरत बताई
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मुंबई:

महाराष्ट्र विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का स्थान भारतीय इतिहास में अद्वितीय है और उनकी तुलना किसी अन्य शासक से करना उचित नहीं है.

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'शिवाजी महाराज राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक'

मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने वक्तव्य में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल मराठा साम्राज्य के संस्थापक नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, राष्ट्रवाद और सुशासन के प्रतीक हैं. टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज जितना बड़ा बताने पर हमें आपत्ति है, यह तुलना स्वीकार्य नहीं है.फडणवीस ने जोर देकर कहा कि इतिहास को संतुलित दृष्टिकोण से समझना जरूरी है और किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि टीपू सुल्तान के शासनकाल से जुड़े कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए, जिनमें सांप्रदायिक तनाव और हजारों हिंदुओं की हत्या के दावों का उल्लेख शामिल है. उन्होंने कहा कि “अब वास्तविक इतिहास सामने आ रहा है” और नई पीढ़ी को तथ्यों से अवगत कराना आवश्यक है.

बता दें कि टीपू सुल्तान को लेकर देश में लंबे समय से मतभेद रहे हैं. एक पक्ष उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला वीर शासक मानता है, जबकि दूसरा पक्ष उनके शासनकाल से जुड़े धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों को प्रमुखता से उठाता है.

फडणवीस ने दिया NCERT पाठ्यक्रम का हवाला

मुख्यमंत्री फडणवीस ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की सरकारों के समय मुगल साम्राज्य और मराठा इतिहास के अध्ययन में असंतुलन देखा गया. उन्होंने दावा किया कि पूर्व पाठ्यक्रम में मराठा इतिहास को सीमित स्थान दिया गया था, जबकि अब शिवाजी महाराज को लगभग 20 पृष्ठों में विस्तृत रूप से शामिल किया गया है. उनके अनुसार, यह बदलाव नई पीढ़ी को अधिक व्यापक और संतुलित ऐतिहासिक जानकारी देने के उद्देश्य से किया गया है.

विपक्ष और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज हो गई है. कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक नजरिए से देखने से समाज में अनावश्यक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है. वहीं, हिंदुत्ववादी संगठनों और मराठा समूहों ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज की तुलना किसी अन्य शासक से नहीं की जा सकती.

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इतिहास बनाम राजनीति?

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में इतिहास के पाठ्यक्रम और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की व्याख्या को लेकर बहस चल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास को वैचारिक पक्षपात से ऊपर रखकर तथ्यों और शोध के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए. महाराष्ट्र की राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज का स्थान अत्यंत भावनात्मक और प्रतीकात्मक है. ऐसे में टीपू सुल्तान के साथ तुलना का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बन जाता है. फिलहाल, मुख्यमंत्री के बयान ने विधानसभा के भीतर और बाहर इतिहास की व्याख्या को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श पर दिखाई दे सकता है.
 

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