Junior Student Ragging: महाराष्ट्र के पुणे में एक जाने-माने लॉ कॉलेज के पांच छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि इन्होंने लड़कों के हॉस्टल (Boys Hostel) में एक सेकेंड ईयर के छात्र के साथ रैगिंग की. जूनियर छात्र ने आरोप लगाया कि उसे सीनियर्स द्वारा मानसिक रूप से परेशान किया गया और उसके साथ गाली-गलौज की गई. मामले में डेक्कन थाना पुलिस (Deccan Police) जांच कर रही है.
पुणे के आईएलएस लॉ कॉलेज (ILS Law College, Pune) में पढ़ने वाले 35 वर्षीय सेकेंड ईयर के छात्र ने डेक्कन थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस ने महाराष्ट्र एंटी-रैगिंग एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज की है. इस घटना से कॉलेज प्रशासन में हलचल मच गई है. जांच में पुलिस यह भी जांच करेगी कि शिकायत के जवाब में कॉलेज प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
कॉलेज प्रशासन की जांच से संतुष्ट नहीं था छात्र
पुलिस अधिकारियों ने रविवार को बताया कि छात्र की शिकायत पर रैगिंग मामले में कॉलेज प्रशासन ने शुरू में मामले की जांच की थी, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं था. इसलिए उसने सहायक दस्तावेजो के साथ इस मामले को आगे बढ़ाया, जिसके बाद यह मामला दर्ज किया गया. रैगिंग के समय पीड़ित LLB का प्रथम वर्ष का छात्र था. आरोप लगाया कि हॉस्टल के अंदर उसके साथ लगातार मानसिक उत्पीड़न, डराना-धमकाना और रैगिंग की गई. आरोपी छात्र उससे एक साल सीनियर थे.
छात्र ने धूम्रपान को लेकर जताई थी आपत्ति
डेक्कन थाने में शनिवार को दी गई एफआईआर के अनुसार, छात्र उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब उसने परिसर में धूम्रपान करने पर आपत्ति जताई. छात्र ने बार-बार गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है. साथ ही बताया कि उसे उसके कमरे में बंद रखा, दरवाजे पर अंडे फेंके और बाहर गुटखा थूका.
वॉशरूम जाने से भी रोका जाता
छात्र ने दावा किया कि रात में उसे परेशान करने के लिए जोर से म्यूजिक बजाया जाता था और कभी-कभी उसे हॉस्टल में आजादी से घूमने से रोका जाता था, यहां तक कि वॉशरूम जाने से भी. छात्र ने कहा कि इन घटनाओं के कारण वह सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गया, उसे गंभीर मानसिक तनाव हुआ और उसके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी बुरा असर पड़ा.
मामले में कॉलेज प्रशासन ने क्या कहा
कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह मामला 2024 का है और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के बीच हुए विवादों से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने UGC के रैगिंग-विरोधी दिशानिर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की. उन्होंने यह भी बताया कि UGC को एक विस्तृत रिपोर्ट भी सौंपी गई थी. आगे बताया कि संस्थान की रैगिंग-विरोधी समिति ने जांच की थी, लेकिन पहली नजर में रैगिंग का कोई सबूत नहीं मिला. चूंकि आरोप साबित नहीं हो पाए, इसलिए किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं थी. अगर रैगिंग का कोई भी मामला साबित हो जाता तो तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती.
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