2008 बम ब्लास्ट केस में क्लीन चिट, पर नहीं मिलेगा वाहन चलाने का लाइसेंस, पुलिस के बाद हाईकोर्ट से भी झटका

Mumbay Blast Case: फहीम अरशद मोहम्मद युसूफ अंसारी को 2008 बम ब्लास्ट केस में आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया. इसके बाद अंसारी ने रोजगार के लिए ऑटो रिक्शा चलाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने जरूरी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन में मामला अटक गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें क्लीयरेंस देने से मना कर दिया था.

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26/11 Mumbai terror Attacks : देश का आर्थिक राजधानी मुंबई से एक अहम कानूनी मामला सामने आया है. दरअसल, यहां 26/11 बम ब्लास्ट केस में बरी होने के बाद भी एक शख्स को ऑटो रिक्शा चलाने के लिए लाइसेंस नहीं मिल पाया. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी पुलिस के फैसले को सही ठहराते हुए उस शख्स की याचिका खारिज कर दी.

दरअसल, फहीम अरशद मोहम्मद युसूफ अंसारी को 2008 बम ब्लास्ट केस में आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने उन्हें निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया. इसके बाद अंसारी ने रोजगार के लिए ऑटो रिक्शा चलाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने जरूरी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन पुलिस वेरिफिकेशन में मामला अटक गया. पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें क्लीयरेंस देने से मना कर दिया. पुलिस का कहना था कि भले ही कोर्ट से बरी हो चुके हैं, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें परमिशन देना ठीक नहीं होगा.

हाईकोर्ट से भी हाथ लगी निराशा

पुलिस के इस फैसले के खिलाफ अंसारी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि जब उन्हें कोर्ट ने निर्दोष करार दे दिया है, तो उन्हें सामान्य नागरिक की तरह काम करने और रोजगार कमाने का अधिकार मिलना चाहिए. हालांकि, हाईकोर्ट ने भी उनकी दलील को नहीं माना. कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस ने जो फैसला लिया है, वह सुरक्षा के लिहाज से सही है. अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में पुलिस को स्थिति के अनुसार फैसला लेने का अधिकार है. इसी के साथ कोर्ट ने अंसारी की याचिका खारिज कर दी.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बयां की अंसारी का दर्द

अंसारी के वकील एडवोकेट पायोशी रॉय ने कोर्ट में अंसार का दर्द बयान करते हुए कहा कि अंसारी के बरी होने के बावजूद, पीसीसी (चरित्र प्रमाण पत्र) न मिलने के कारण उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है. उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा सेवाओं, निजी कंपनियों, कारखानों, स्कूलों और कॉलेजों सहित अन्य सभी नौकरियों के लिए पुलिस से चरित्र प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इन नौकरियों में वेतन केवल 7,000 से 10,000 रुपये प्रति माह है, जो अंसारी के परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि कोई भी उन्हें घरेलू नौकर या निजी ड्राइवर के रूप में काम पर रखने को तैयार नहीं है.

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इससे पहले सुनवाई के दौरान दिसंबर 2025 में न्यायमूर्ति एएस गडकरी और रणजीत सिंह राजा भोंसले की खंडपीठ ने अंसारी की वकील, एडवोकेट पायोशी रॉय की दलील सुनने के बाद कहा था कि हमने आपको रिपोर्ट दिखा दी हैं. लिहाजा, हम इससे आगे नहीं जा सकते हैं. उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की ओर से उनकी याचिका के कड़े विरोध और अदालत में प्रस्तुत गए एक गोपनीय पुलिस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें अंसारी पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन से कथित संबंध होने का आरोप लगाया गया था.

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