MP Politics: मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार (Umang Singhar) ने शनिवार को भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने छिंदवाड़ा की हालिया घटना को लेकर सरकार की मुआवजा नीति, प्रशासनिक संवेदनहीनता और बढ़ते कर्ज पर सवाल खड़े किए. उमंग सिंघार ने बताया कि कांग्रेस विधायक दल की ओर से छिंदवाड़ा हादसे में मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित मुआवजा राशि बेहद कम है और इससे पीड़ित परिवारों को राहत नहीं मिल पा रही है.
मध्यप्रदेश में क्यों नहीं है एक समान कंपनसेशन पॉलिसी?
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि मध्यप्रदेश में अब तक कोई समान कंपनसेशन पॉलिसी क्यों नहीं बनाई गई. उन्होंने कहा कि सरकार घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन पीड़ित व्यक्ति को विभागों के चक्कर लगाते रहना पड़ता है. सरकार को एक स्पष्ट और सरल मुआवजा नीति बनाने की आवश्यकता है.
सभा में नहीं आने पर कार्रवाई की धमकी
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सभा में शामिल नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी देने वाले पत्र छिंदवाड़ा में अधिकारियों द्वारा जारी किए गए. इसके साथ ही लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया.
गरीबों के लिए नीति नहीं, टेंडरों के लिए तत्पर सरकार
उन्होंने कहा कि जिन टेंडरों में कमीशन मिलता है, सरकार उनके लिए तुरंत पॉलिसी बना देती है, लेकिन गरीबों और पीड़ितों के लिए कोई ठोस नीति नहीं है. उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ऐसी घटनाओं के लिए कोई सिंगल विंडो सिस्टम बनाएगी?
LPG और व्यापारियों को लेकर भी सवाल
उमंग सिंघार ने एलपीजी गैस को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो अल्टरनेटिव पॉलिसी बताई और न ही यह स्पष्ट किया कि रिजर्व कितना था. इसके अलावा होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के भविष्य को लेकर भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए.
पांच साल में 65 हजार हादसे, मौतों में देश में दूसरा स्थान
नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 65 हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 14,791 लोगों की मौत हुई. इस मामले में मध्यप्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है.
मध्यप्रदेश को ‘EMI मॉडल' पर चला रही है सरकार
उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री कर्ज लेने में धुरंधर हैं और प्रदेश को “EMI मॉडल” पर चला रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दो दशकों से सत्ता में बैठी भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर लाखों करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हालात जस के तस हैं. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष खत्म होते-होते चौथी बार 2500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है और इस साल कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने तय कर लिया है कि प्रदेश को कर्ज में डुबोकर ही छोड़ेगी?
कर्ज का पैसा कहां गया?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता टैक्स पर टैक्स दे रही है, महंगाई झेल रही है, जबकि सरकार बिना किसी रोडमैप और पारदर्शिता के कर्ज पर कर्ज ले रही है. आखिर यह कर्ज किस योजना में लगा और उसका क्या परिणाम निकला, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए.
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