- केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून और पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह की प्रेम कहानी चर्चा में
- धर्मेंद्र सिंह ने 2007 में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटी और जेल में अच्छे आचरण के कारण रिहा हुए
- फिरोजा खातून और धर्मेंद्र सिंह की शादी हिंदू रीति-रिवाज से छतरपुर में संपन्न हुई, बजरंग दल ने कन्यादान किया
Satna Jailer Love Story: मध्यप्रदेश में सतना और छतरपुर के बीच इन दिनों एक ऐसी प्रेम कहानी सुर्खियां बटोर रही है, जो किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है. यह कहानी है केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून और पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह की. कानून की रक्षक और उम्रकैद की सजा काट चुके एक शख्स के बीच उपजा यह प्रेम अब विवाह के पवित्र बंधन में बदल चुका है. बीते 5 मई को छतरपुर के लवकुशनगर में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए. मुस्लिम अधिकारी के परिजन इस शादी से नाराज थे लिहाजा वे इसमें शामिल नही हुए तब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कन्यादान देकर सारी रस्में पूरी की.
ड्यूटी के दौरान मिलीं नजरें, 2022 में रिहाई के बाद भी नहीं टूटा रिश्ता
दरअसल फिरोजा खातून और धर्मेंद्र की मुलाकात जेल की चारदीवारी के भीतर हुई थी. फिरोजा वहां वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, जबकि हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा धर्मेंद्र जेल में वारंट संबंधी कार्यों में मदद करता था. यहीं से शुरू हुआ दोस्ती का सिलसिला जल्द ही प्यार में बदल गया. दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र को उसके अच्छे आचरण की वजह से साल 2022 में जेल से रिहा कर दिया गया था. जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का संपर्क नहीं टूटा. फोन पर घंटों होने वाली बातों ने उनके प्यार को और मजबूत किया और अंततः उन्होंने शादी करने का फैसला किया.
जब अपनों ने फेरा मुंह, तो बजरंग दल ने निभाया 'कन्यादान'
लेकिन, यह विवाह जितना अनोखा था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी. मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली फिरोजा के इस फैसले से उनके परिजन खुश नहीं थे और उन्होंने शादी से दूरी बना ली. ऐसे नाजुक मोड़ पर सामाजिक सौहार्द की एक अलग तस्वीर देखने को मिली. शादी समारोह में पहुंचे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने न केवल फिरोजा का साथ दिया, बल्कि पिता और भाई का फर्ज निभाते हुए उनका 'कन्यादान' भी किया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई इस शादी ने समाज को अनूठा संदेश दिया है.
2007 नगर परिषद उपाध्यक्ष की हत्या की थी धर्मेन्द्र ने
धर्मेंद्र सिंह का अतीत काफी संगीन रहा है. साल 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या और शव को जमीन में दफनाने के मामले में उसे दोषी पाया गया था. इस सनसनीखेज मामले में उसे उम्रकैद हुई. करीब 14 साल जेल में बिताने के दौरान धर्मेंद्र के स्वभाव में बड़ा बदलाव आया. जेल प्रशासन ने उसके अच्छे आचरण को देखते हुए ही उसे समय से पहले रिहा करने की सिफारिश की थी. आज उसी धर्मेंद्र एक नया जीवन शुरू हुआ है.
चर्चा में है सतना की ये 'गंगा-जमुनी' शादी
वर्तमान में सतना जेल में उप-जेलर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहीं फिरोजा खातून की इस हिम्मत की हर जगह चर्चा है. लोगों का कहना है कि उन्होंने ड्यूटी में जितनी ईमानदारी दिखाई, अपने प्यार को मुकाम तक पहुंचाने में भी उतनी ही निर्भीकता दिखाई. सतना से लेकर छतरपुर तक लोग इसे सामाजिक सद्भाव और आपसी विश्वास की एक बेमिसाल मिसाल के तौर पर देख रहे हैं.
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