सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 34 लोगों से करोड़ों की वसूली, रायपुर में शिक्षक और क्लर्क गिरफ्तार

Job Fraud Case: रायपुर ग्रामीण में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 34 लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है. पुलिस ने शिक्षक और क्लर्क को गिरफ्तार किया है. जानिए कैसे फंसाया जाता था.

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रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा नौकरी ठगी मामले में गिरफ्तार शिक्षक और क्लर्क

Job Fraud Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे ग्रामीण इलाके में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर की जा रही बड़ी ठगी का पुलिस ने खुलासा किया है. इस मामले में एक शासकीय शिक्षक और निजी स्कूल के क्लर्क को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी नियुक्ति आदेश जारी कर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूल रहे थे. आरोपियों ने सामान्य प्रशासन विभाग, नवा रायपुर के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली दिखाने की पूरी साजिश रची. अब तक की जांच में करीब 34 लोगों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है. मामले के खुलासे के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस अन्य पीड़ितों की तलाश में जुटी है.

Crime News: नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरफ्तार

नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा

रायपुर ग्रामीण पुलिस के अनुसार आरोपियों ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाया. इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग, नवा रायपुर के नाम से विभिन्न विभागों में भर्ती दर्शाते हुए फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किए गए. इन आदेशों में सचिव और उप‑सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर तक का दुरुपयोग किया गया, जिससे दस्तावेज पूरी तरह असली प्रतीत होते थे.

Crime News: नौकरी के नाम पर ठगी

व्हाट्सएप से फैलाई गई फर्जी नियुक्ति सूची

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इन फर्जी नियुक्ति आदेशों को व्हाट्सएप के जरिए वायरल किया. सोशल मीडिया और निजी संपर्कों के माध्यम से बेरोजगार युवाओं तक ये आदेश पहुंचाए गए और सरकारी नौकरी का भरोसा दिलाया गया. इस झांसे में आकर 34 लोगों ने अलग‑अलग किस्तों में करीब 1.5 करोड़ रुपये आरोपियों को सौंप दिए.

शिक्षक और क्लर्क निकले मुख्य आरोपी

जांच के दौरान मुख्य आरोपी की पहचान राजेश शर्मा उर्फ राजू के रूप में हुई है, जो पेशे से शासकीय शिक्षक है. उसे राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने बताया कि आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव में उसने इस ठगी की साजिश रची. इस पूरे फर्जीवाड़े में उसका साथ मनोज कुमार श्रीवास्तव ने दिया, जो एक निजी स्कूल में क्लर्क के पद पर कार्यरत है. दोनों ने मिलकर कंप्यूटर पर फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार किए और मोबाइल फोन के जरिए लोगों तक पहुंचाया.

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तकनीकी साक्ष्यों से खुली पोल

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई. पुलिस ने आरोपियों के पास से कंप्यूटर सेट और प्रिंटर जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया गया था.

धाराओं में मामला दर्ज, जांच जारी

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और ठगी के शिकार अन्य लोगों की पहचान की जा रही है. पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नौकरी के नाम पर किसी भी तरह के लालच से बचें और ऐसे मामलों की तुरंत सूचना दें.

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