- गिरफ्तार तस्कर राकेश जाट आईटीआई डिप्लोमा धारक है. एमपी के नीमच का रहने वाला है.
- राजस्थान ANTF की टीम ने बिना वर्दी और बिना हथियारों के साधारण 'तीर्थयात्रियों' का वेश धारण किया.
- ड्रग तस्कर राकेश जाट को खोजने के लिए 48 घंटों में उज्जैन के करीब 15 मंदिरों की खाक छानी.
पिछले चार महीनों से राजस्थान पुलिस उसके पीछे पड़ी थी. छापे मारे गए, मुखबिरों को सक्रिय किया गया, संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई और मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक हर सुराग का पीछा किया गया. लेकिन हर बार जब पुलिस को लगता कि वह गिरफ्त में आने ही वाला है, 37 वर्षीय राकेश जाट हवा हो जाता. पुलिस एक कथित ड्रग्स तस्कर की तलाश में थी, उधर ड्रग्स तस्कर खुद अपनी मुसीबतों से पीछा छुड़ाने के लिए भगवान की शरण तलाश रहा था ताकि अपनी कुंडली का 'कालसर्प दोष' हटवा सके.
फिर कहानी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरी पुलिस कार्रवाई को किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर जैसा बना दिया. पुलिस को एक बेहद पुख्ता सूचना मिली. बताया गया कि लगातार पुलिसिया दबाव और अपने अवैध कारोबार में आ रही दिक्कतों से परेशान राकेश जाट एक ज्योतिषी के पास पहुंचा था. उसने अपनी कुंडली दिखाई और पूछा कि आखिर मुसीबतें उसका पीछा क्यों नहीं छोड़ रही हैं.
ज्योतिषी ने बताया कालसर्प दोष
ज्योतिषी ने कथित तौर पर उसकी कुंडली देखकर कहा, "तुम्हारी परेशानी की वजह पुलिस नहीं, बल्कि कालसर्प दोष है. इसका निवारण केवल उज्जैन में विशेष पूजा-अर्चना से ही हो सकता है." बस, यहीं से किस्मत ने नया खेल शुरू कर दिया. जैसे ही यह सूचना राजस्थान पुलिस तक पहुंची, ऑपरेशन की दिशा बदल गई. पांच सदस्यीय ANTF टीम को तत्काल उज्जैन भेजा गया. लेकिन यह कोई सामान्य पुलिस रेड नहीं थी; न वर्दी थी, न पुलिस वाहन और न ही हथियारों का प्रदर्शन.
आखिरकार मिली सफलता
उज्जैन के एक छोटे से मंदिर में पुलिसकर्मियों ने उसे पहचान लिया. राकेश जाट वहां पुजारियों के साथ बैठकर कालसर्प दोष निवारण की विशेष पूजा कर रहा था. मंत्रोच्चार चल रहा था, हवन में आहुतियां दी जा रही थीं और वह व्यक्ति, जो महीनों से पुलिस को छकाता फिर रहा था, अपनी किस्मत बदलने की कोशिश में लीन था. उसे भनक तक नहीं थी कि उसकी किस्मत तीर्थयात्रियों के वेश में पहले ही वहाँ पहुँच चुकी है.
पूजा जारी रही और पुलिसकर्मी धीरे-धीरे उसके करीब पहुंचते गए. न कोई फिल्मी पीछा हुआ, न गोलियां चलीं और न ही कोई ड्रामाई मुठभेड़ हुई. दो राज्यों की पुलिस को महीनों तक छकाने वाला आरोपी उसी मंदिर से शांतिपूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया, जहाँ वह अपनी परेशानियों से मुक्ति की तलाश में पहुंचा था.
मारवाड़ ड्रग नेटवर्क की अहम कड़ी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, राकेश जाट कोई छोटा-मोटा तस्कर नहीं था. राजस्थान ANTF का दावा है कि वह पश्चिमी मध्य प्रदेश में अवैध रूप से उगाई जा रही अफीम और डोडाचूरा को इकट्ठा कर राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में सक्रिय तस्करों तक पहुंचाने वाली सप्लाई चेन की सबसे अहम कड़ी था.
आईटीआई डिप्लोमा से अपराध की दुनिया तक
राकेश की कहानी खुद किसी क्राइम थ्रिलर जैसी है. जहां अधिकांश ड्रग तस्करों की पृष्ठभूमि साधारण या अनपढ़ होती है, वहीं राकेश चित्तौड़गढ़ से आईटीआई (ITI) डिप्लोमा धारक है. कभी वह नीमच में अपने परिवार की खेती में हाथ बंटाता था. करीब दस साल पहले उसकी मुलाकात एक अफीम ठेकेदार से हुई और यहीं से वह धीरे-धीरे मादक पदार्थों के काले कारोबार में उतर गया.
कुछ साल बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे एक बड़े ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया, जिसके बाद वह करीब 18 महीने जेल में रहा. जांचकर्ताओं का दावा है कि जेल ही उसके आपराधिक करियर का 'टर्निंग पॉइंट' साबित हुई. वहीं उसकी मुलाकात राजस्थान के कुख्यात तस्करों से हुई और जेल से बाहर आने के बाद वह उनके नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बन गया.
जोधपुर ग्रामीण में भी मामला दर्ज
साल 2023 में जोधपुर ग्रामीण जिले के बालेसर थाने में दर्ज एक मामले में उसका नाम मुख्य रूप से सामने आया था, जब मध्य प्रदेश से राजस्थान जा रहे चार ट्रकों में से एक को पकड़कर भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए थे. तभी से वह फरार चल रहा था.
राकेश की यह गिरफ्तारी राजस्थान ANTF के "ऑपरेशन मदमनीरा" का हिस्सा थी. दिलचस्प बात यह है कि इस ऑपरेशन से ठीक एक दिन पहले इसी एजेंसी ने झारखंड में एक अन्य वांछित तस्कर को पकड़ने के लिए अपने अधिकारियों को रेलवे इंजीनियर बनाकर भेजा था. एक ऑपरेशन में पुलिस तीर्थयात्री बनी, तो दूसरे में इंजीनियर, लेकिन निशाना एक ही था देशभर में फैले ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करना.
राकेश जाट उज्जैन अपनी कुंडली से कालसर्प दोष हटवाने आया था. उसे उम्मीद थी कि इस पूजा-पाठ के बाद उसकी परेशानियां खत्म हो जाएंगी. लेकिन महाकाल की नगरी में उसका सामना ग्रह-नक्षत्रों से नहीं, बल्कि कानून के शिकंजे से हुआ. महीनों तक पुलिस और खुफिया एजेंसियों को चकमा देने वाला यह तस्कर आखिरकार किसी फार्महाउस या बॉर्डर पर भागते हुए नहीं, बल्कि भगवान के दरबार में अपनी किस्मत दोबारा लिखने की कोशिश करते हुए दबोच लिया गया.
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