नर्मदा नदी और बरगी बांध के 'सूखे' की तस्वीरें, जहां बोट से भी लगता था डर, अब वहां पैदल पहुंच रहे लोग

जबलपुर में नर्मदा नदी और बगरी बांध का जलस्तर काफी कम हो गया है. इसका मुख्य कारण मानसून आने में हुई दूरी और जून महीने में हुई कम बरसात है.

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मप्र में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सामने आ सकता है बढ़ा जल संकट.

जबलपुर: मध्य प्रदेश में मानसून के आने में हुई देरी और अब तक हुई कम बारिश का असर प्रदेश के सबसे बड़े जलाशयों में शामिल बरगी बांध और नर्मदा नदी पर साफ दिखाई देने लगा है. गिरते जलस्तर के कारण बरगी बांध की सिंचाई नहरें सूख चुकी हैं. बीते 40 साल में जलस्तर पहली बार इतना कम हुआ है कि निकासी द्वार (इनलेट) भी सामने आ गए हैं, जो अब तक पानी में डूबे रहते थे. 

NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि जिन निकासी द्वारों से नहरों में पानी छोड़ा जाता है, वहां अब पानी करीब 100 मीटर दूर खिसक गया है. इससे इनलेट संरचना पूरी तरह सूखी जमीन पर दिखाई दे रही है और उस पर लगी लोहे की जालियां भी पहली बार स्पष्ट नजर आ रही हैं. नर्मदा नदी के जलस्तर में आई भारी गिरावट का असर शहर के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है. कई जगह टॉपू दिखने लगे हैं. हालात यह हैं कि जहां लोग बोट से भी जाने में डरते थे, वहां अब कुछ लोग पैदल पहुंच रहे हैं. 

एमपी के दो सबसे बड़े जलाशयों नर्मदा नदी और बरगी बांध में गिरा पानी का जलस्तर.

बरगी बांध (रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना) नर्मदा नदी पर बना है. इससे निकलने वाली नहरों के जरिए जबलपुर और नरसिंहपुर जिले के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई होती है. लेकिन, इस बार मानसून में हुई देरी और जून महीने में हुई कम बारिश के कारण अधिकांश नहरें सूख चुकी हैं.  

प्रतिदिन 5 सेंटीमीटर घट रहा जलस्तर

बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार, 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो अब घटकर 407.45 मीटर के करीब रह गया है. करीब 17 दिन में जलस्तर में 40 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है. वर्तमान में बांध में मात्र 12.59 प्रतिशत जल भंडारण शेष है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह लगभग 22 प्रतिशत था. पिछले करीब 15 साल में जलस्तर इतना कम पहली बार हुआ है. 

बरगी बांध और नर्मदा नदी के जलस्तर में आई कमी.

40 साल पुरानी मोटर बोट फिर आई नजर

बरगी बांध का जलस्तर घटने से करीब 40 साल पुरानी लोहे की मोटर बोट भी दिखाई देने लगी है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मोटर बोट साल 1986 के आसपास डूब गई थी और वर्षों बाद जलस्तर कम होने पर फिर दिखाई दी है. इस बोट का उपयोग बरगी बांध निर्माण के दौरान पुनर्वास विभाग द्वारा विस्थापित परिवारों के आवागमन और राहत कार्य के लिए किया जाता है. 

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1986 में डूबी उस मोटर बोट की कहानी जिस पर अब लोग ले रहे सेल्फी, जबलपुर बरगी बांध का जलस्तर घटने से नजर आई

पानी की कमी होने से किनारे पर पड़ी नाव.

नर्मदा के घाटों पर बदला स्वरूप

नर्मदा नदी के जलस्तर में आई भारी गिरावट का असर शहर के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है. गौरीघाट सहित कई स्थानों पर नदी का जल इतना कम हो गया है कि जहां पहले लोग तैरकर नदी पार करते थे, वहां अब कई लोग पैदल ही पहुंच रहे हैं. नदी के बीच चट्टानें और रेतीले टापू उभर आए हैं, जिससे नर्मदा का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है.

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नर्मदा नदी पर बना है बगरी बांध.

जल संकट गहराने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर, जुलाई में सामान्य से कम बारिश हुई तो पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन तीनों पर गंभीर असर पड़ सकता है. बरगी बांध की सूखी नहरें, सामने आए निकासी द्वार और नर्मदा का घटता जलस्तर प्रदेश में गहराते जल संकट की गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया है. कई जिलों में बारिश भी हो रही है. बारिश का दौर अगर, ऐसे ही जारी रहा तो जल संकट का खतरा टल सकता है. 

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बरगी बांध में 40 साल में पहली बार कम हुआ इतना पानी.

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