गेहूं खरीदी के साथ MP में सियासत शुरू; सड़कों पर किसान आंदोलन, सीहोर में कांग्रेस ने कुत्ते को बनाया कलेक्टर

MP Gehu Kharidi: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की शुरुआत अजब‑गजब हालातों के बीच हुई. कहीं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखी, तो कहीं एमएसपी और नुकसान के मुआवजे को लेकर राजनीतिक प्रदर्शन. वहीं कुछ जिलों में गेहूं बेचने को लेकर किसानों की उदासीनता ने नीति और व्यवस्थाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा. पढ़िए NDTV ब्यूरो नेटवर्क की ये रिपोर्ट.

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MP गेहूं खरीदी में अव्यवस्था और MSP मुद्दे पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन

MP Gehu Kharidi: मध्य प्रदेश में जैसे ही रबी विपणन वर्ष के तहत गेहूं खरीदी का शुभारंभ हुआ, वैसे ही प्रदेश की सियासत भी गर्मा गई. एक ओर सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू करने का दावा किया, तो दूसरी ओर विपक्षी कांग्रेस ने किसानों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी और अव्यवस्थाओं के गंभीर आरोप लगाए. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कहीं समर्थन, कहीं नाराजगी और कहीं उग्र प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं. कई जिलों में किसानों ने चक्काजाम कर सड़कों पर अपना गुस्सा जाहिर किया, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं कुछ जिलों में एमएसपी पर गेहूं बेचने को लेकर किसानों में साफ तौर पर उदासीनता देखने को मिली. कुल मिलाकर, गेहूं खरीदी की शुरुआत के साथ ही प्रदेश में प्रशासनिक तैयारियों, राजनीतिक टकराव और किसानों की जमीनी समस्याओं की एक जटिल तस्वीर उभरकर सामने आई.

सीहोर में कुत्ते को बताया कलेक्टर, देखिए वीडियो

प्रदेशभर में शुरू हुई गेहूं खरीदी, दिखे अलग‑अलग रंग

मध्य प्रदेश में आज से प्रदेशभर के गेहूं खरीदी केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. सरकार का दावा है कि पर्याप्त केंद्र बनाए गए हैं और किसानों की सुविधा के लिए जरूरी इंतज़ाम किए गए हैं. लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई. कहीं किसान खरीदी शुरू होने का स्वागत करते दिखे, तो कहीं अव्यवस्था और देरी को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आई. इस बीच सबसे ज्यादा जो रंग दिखाई दिया, वह था विरोध प्रदर्शन का. दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने किसानों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर पहले से ही प्रदेशव्यापी आंदोलन का आह्वान कर रखा था, जिसका असर पहले ही दिन साफ देखने को मिला.

सरकार ने बार‑बार बदली खरीदी की तारीख : कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने गेहूं खरीदी की पहले से घोषित तारीख को बार‑बार आगे बढ़ाया, जिससे किसान मानसिक और आर्थिक संकट में फंस गए. विपक्ष का कहना है कि भारी बारिश, ओलावृष्टि और आंधी‑तूफान की वजह से किसानों की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने न तो समय पर खरीदी शुरू की और न ही नुकसान का मुआवजा दिया. इन्हीं मांगों को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किसानों के साथ मिलकर जिला कलेक्ट्रेटों पर प्रदर्शन किए और ज्ञापन सौंपे.

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शिवपुरी: खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था से परेशान किसान

एमपी में गेहूं खरीदी शुरू होते ही सबसे पहले जो तस्वीर सामने आई, वह शिवपुरी से आई और वह थी अव्यवस्था की. शिवपुरी जिले में गेहूं खरीदी केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर किसान बेहद नाराज नजर आए. किसानों का कहना है कि केंद्रों पर न पीने का पानी है, न शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं. ऊपर से बेमौसम बारिश ने हालात और खराब कर दिए हैं. गांवों की सड़कों पर भरा पानी और खुले में रखा गेहूं भीगने का खतरा बढ़ा रहा है. किसानों का कहना है कि अगर उनकी फसल भीग गई तो व्यापारी गुणवत्ता के नाम पर दाम घटा देंगे, जिससे उन्हें सीधा नुकसान होगा.

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सागर: खरीदी में देरी से सड़कों पर उतरे किसान

शिवपुरी के बाद सागर जिले में भी किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आई. यहां गेहूं खरीदी शुरू न होने से गुस्साए किसानों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया. नाराज किसानों ने सागर‑बीना हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई. आम राहगीरों और यात्रियों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी. मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन को प्रदर्शनकारी किसानों को समझाने‑बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि, स्थिति को बाद में नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन किसानों की नाराजगी ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए.

सागर में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद किसानों के बीच पहुंचे. सागर जिले में गेहूं खरीदी शुरू न होने से नाराज किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया. जीतू पटवारी ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके से ही सागर कलेक्टर से फोन पर चर्चा की. उन्होंने जल्द से जल्द मंडी में खरीदी शुरू कराने के निर्देश देने की मांग की. जीतू पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी.

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भोपाल: गेहूं खरीदी से ज्यादा सियासत गरमाई

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भले ही गेहूं खरीदी केंद्रों से सीधा सरोकार कम हो, लेकिन यहां सूबे की सियासत पूरी तरह गरमा गई. कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार पर खरीदी की तारीख बार‑बार बदलने का आरोप लगाया. कांग्रेस का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को जो नुकसान हुआ, उसका अब तक सही आंकलन नहीं हुआ है और न ही समय पर मुआवजा दिया गया है. प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने भोपाल कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा.

MP Gehu Kharidi 2026: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी पर सियासत जारी

इंदौर: वादाखिलाफी के आरोप में कलेक्ट्रेट का घेराव

प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के आह्वान पर इंदौर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने किसानों की बदहाली और सरकार की कथित वादाखिलाफी के विरोध में कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया. कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही सरकार ने सिर्फ 40 रुपये का बोनस देकर किसानों के साथ धोखा किया. कांग्रेस ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में 150 रुपये बोनस दिया जा रहा है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

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खंडवा: उग्र प्रदर्शन, बैरिकेड्स तक पहुंचे कार्यकर्ता

खंडवा में कांग्रेस का प्रदर्शन और भी उग्र रूप में देखने को मिला. किसानों के मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कार्यालय गांधी भवन से रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तीन‑स्तरीय सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया और बैरिकेड्स पर चढ़कर नारेबाजी की. कांग्रेसी अपने साथ खाली बारदाना लेकर आए थे, जो गेहूं खरीदी में देरी का प्रतीक बताया गया. प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी, हालांकि पुलिस बल की मौजूदगी में हालात पर काबू पा लिया गया.

बैतूल: MSP पर गेहूं बेचने को लेकर उदासीनता ने चौंकाया

प्रदेशभर में विरोध, नाराजगी और प्रदर्शन के बीच बैतूल से एक अलग ही तस्वीर सामने आई. यहां समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के ऐलान के बावजूद किसानों में खास उत्साह नजर नहीं आया. दो बार पंजीयन की तारीख बढ़ाने के बाद भी जिले में उम्मीद से बहुत कम किसानों ने अपना पंजीयन कराया है. जिले में गेहूं का कुल रकबा 2 लाख 76 हजार 638 हेक्टेयर है, लेकिन इसके मुकाबले केवल करीब 41 हजार हेक्टेयर के किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है. कुल मिलाकर अब तक महज 18 हजार किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. बैतूल के किसानों का कहना है कि सरकार ने खरीदी की एक सीमा तय कर दी है. एक एकड़ में केवल 13 क्विंटल तक ही गेहूं खरीदा जा रहा है, जबकि वास्तविक उत्पादन इससे कहीं ज्यादा होता है. ऐसे में बची हुई उपज को लेकर किसान असमंजस में हैं कि उसे कहां बेचें. इसके अलावा 30 मार्च तक बैंक लोन चुकाने की बाध्यता के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है. बाउंडेशन की वजह से 10‑12 क्विंटल से ज्यादा खरीदी न होने की आशंका ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.

प्रशासन का पक्ष

बैतूल के जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी केके टेकाम का कहना है कि जिले में लगभग 18 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जिनका स्वीकृत रकबा करीब 41 हजार हेक्टेयर है. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा तय रकबे के अनुसार ही खरीदी की जाएगी.

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