MP Congress Kisan Andolan Mumbai Agra Highway Chakka Jam: मध्यप्रदेश में बदलते सियासी हालात के बीच कांग्रेस अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करती नजर आ रही है. महिलाओं के एक बड़े वोट बैंक के सरकार की ओर झुकाव के बाद कांग्रेस ने अपना फोकस पूरी तरह किसानों पर केंद्रित कर दिया है. पार्टी का मानना है कि मौजूदा हालात में प्रदेश का अन्नदाता सबसे ज्यादा परेशान है और यदि इन मुद्दों को प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाए, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकता है. इसी रणनीति के तहत कांग्रेस और किसान संगठन मिलकर 7 मई को मुंबई–आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करने जा रहे हैं. यह आंदोलन किसानों की फसल खरीदी, मुआवजा, मंडी व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है.
जीतू पटवारी का सरकार पर सीधा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर किसानों के साथ अत्याचार का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 43 डिग्री की भीषण गर्मी में किसान अपनी गेहूं की फसल लेकर सड़कों के किनारे खड़े रहने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकार के पास न तो खरीदी की सही नीति है और न ही सही नीयत. पटवारी ने ऐलान किया कि, “मोहन सरकार के खिलाफ हम मुंबई–आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम करेंगे. हम किसान के बेटे हैं, न जेल से डरेंगे और न ही पीछे हटेंगे.”
खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था का मुद्दा
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश के लगभग हर खरीदी केंद्र पर गड़बड़ियां हैं. टोल कांटों की कमी, अव्यवस्थित मंडियां और भ्रष्टाचार के चलते किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी का कहना है कि आज प्रदेश का किसान खून के आंसू रो रहा है.
7 मई को मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस और किसान संगठनों ने 7 मई को मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम का एलान किया है. कांग्रेस के सेवादल और किसान मोर्चा अलग‑अलग स्तर पर इस आंदोलन की तैयारियों में जुटे हैं. पार्टी इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप देने की कोशिश में है.
महिला वोट बैंक के बाद कांग्रेस का नया फोकस किसान
मध्यप्रदेश में लाडली बहना और लाडली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के चलते महिलाओं का एक बड़ा वोट बैंक सरकार के पाले में जाता दिख रहा है. कांग्रेस नेतृत्व यह भलीभांति समझता है कि इस स्थिति में महिला मतदाताओं को साधना आसान नहीं है. ऐसे में पार्टी ने गांव‑गांव पहुंचकर किसानों की समस्याओं को उठाने की रणनीति अपनाई है.
कांग्रेस को क्यों दिख रहा किसान आंदोलन में राजनीतिक मौका?
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रदेश में किसान इस वक्त सबसे ज्यादा पीड़ा झेल रहा है. गेहूं की खरीदी में अव्यवस्था, उचित समर्थन मूल्य नहीं मिलना, खराब फसलों का मुआवजा अटकना और मंडियों में भ्रष्टाचार, ये सभी मुद्दे किसानों में असंतोष पैदा कर रहे हैं. कांग्रेस को लगता है कि यदि इस असंतोष को संगठित रूप दिया गया, तो इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है.
MP Congress Kisan Andolan: किसान आंदोलन चक्काजाम
किसानों की मांगें, जिन पर सरकार घिरी
कांग्रेस लंबे समय से विभिन्न जिलों में किसानों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है. इनमें प्रमुख मांगें हैं :
- फसलों का उचित समर्थन मूल्य
- खराब फसलों का तत्काल मुआवजा
- मंडियों में पारदर्शिता
- खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाना
अब पार्टी इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़कर प्रदेशव्यापी आंदोलन खड़ा करना चाहती है.
भाजपा का पलटवार
उधर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस किसानों के नाम पर सिर्फ राजनीति करती है. भाजपा नेता यशपाल सिसोदिया का आरोप है कि कांग्रेस पहले भी मुलताई और मंदसौर गोलीकांड जैसे मुद्दों के सहारे सत्ता में आने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन जनता ने उस राजनीति को नकार दिया.
43 डिग्री तापमान में किसान लाइन में
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश की मंडियों में किसान 43 डिग्री तापमान में लंबी लाइनों में खड़ा है. फसल की खरीदी कब और कैसे होगी, इसका स्पष्ट जवाब अभी भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है. कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में उसकी सियासत किसानों के इर्द‑गिर्द घूमने वाली है. 7 मई को मुंबई–आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित चक्काजाम न सिर्फ सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी नई दिशा दे सकता है.
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