Blackbucks in Chhattisgarh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 'मन की बात' कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के काले हिरण के बारे में बताया. पीएम ने कहा कि मध्य भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है. छत्तीसगढ़ के खुले मैदानों में काले हिरण की वापसी हुई है. पीएम मोदी ने कहा कि कई वर्षों तक स्थानीय स्तर पर विलुप्त होने और निरंतर संरक्षण उपायों के बाद ये सुंदर मृग एक बार फिर राज्य के प्राकृतिक परिदृश्यों में स्वतंत्र रूप से दौड़ रहे हैं, जो लुप्त हो रही जैविक विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है.
बरनावापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में केंद्रित पांच वर्षीय समर्पित पुनरुद्धार कार्यक्रम के कारण ही काले हिरणों की वापसी संभव हो पाई है. 2017 में स्थानीय रूप से विलुप्त घोषित होने के बाद राज्य वन विभाग ने एक रणनीतिक पुनर्प्रवेश योजना शुरू की, जिसके तहत नई दिल्ली के राष्ट्रीय चिड़ियाघर और बिलासपुर के कानन पेंदारी चिड़ियाघर से हिरणों को स्थानांतरित किया गया.
27 काले हिरणों को बारनवापारा लाकर बसाया गया
दरअसल, छत्तीसगढ़ वन विभाग ने 2021 में काले हिरणों के पुनर्वास के लिए पांच वर्षीय विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की. इस योजना के तहत दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणि उद्यान से 50 और बिलासपुर के कनन पेंडारी प्राणि उद्यान से 27 काले हिरणों को बारनवापारा लाकर बसाया गया. अनुकूल वातावरण और लगातार निगरानी का परिणाम यह हुआ कि अब यहां काले हिरणों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है.
पीएम मोदी ने की सराहना
पीएम ने विशेष रूप से ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की ओर इशारा किया, जो एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है और उन्नत प्रजनन कार्यक्रमों के माध्यम से इस प्रजाति के लिए नई उम्मीदें जग रही हैं. हाल की उपलब्धियों में गुजरात में अंतरराज्यीय पहल के तहत चूजों का सफल प्रजनन शामिल है, जिसके तहत स्थानीय आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए राजस्थान से अंडे लाए गए थे. प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच विकसित हो रहे संबंधों की भी पीएम मोदी सराहना की.
इसके साथ ही मन की बात में पीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में, मानव-हाथी संघर्षों को कम करने में एक सामुदायिक-संचालित मॉडल प्रभावी साबित हो रहा है. उत्तर प्रदेश के स्थानीय ग्रामीणों ने हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 'हाथी मित्र दल' के नाम से जानी जाने वाली समर्पित टीमें बनाई हैं.
ड्रोन और व्हाट्सएप अलर्ट का उपयोग करते हुए ये स्वयंसेवक अपने समुदायों को समय पर चेतावनी देते हैं, जिससे फसलों और जीवन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. सह अस्तित्व की ओर इस सक्रिय बदलाव से संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आई है और जनता का विश्वास काफी बढ़ा है. स्थानीय नागरिकों को उनके पर्यावरण के प्राथमिक संरक्षक के रूप में शामिल करके, राज्य संरक्षण की एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है जो विकासात्मक आवश्यकताओं को भारत के विविध जीव-जंतुओं के संरक्षण के साथ संतुलित करती है.














