CG News: नारायणपुर रेलवे भूमि अधिग्रहण का विरोध, जानिए क्या है मांगे

Farmers Protest: नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने किसानों को उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया है. लेकिन, किसानों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अगर प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो वे सड़क पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी.

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CG News: नारायणपुर रेलवे भूमि अधिग्रहण का विरोध, जानिए क्या है मांगे

CG News: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर (Narayanpur) में रेलवे पटरी (Rail Line Project) विस्तार परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है. विकास की इस दौड़ में अपनी जमीन खो रहे किसानों (Farmers Protest) का गुस्सा फूट पड़ा. मुआवजे की पुरानी दरों में सुधार और नौकरी की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. NDTV रिपोर्टर आकाश सिंह ने इसकी पूरी पड़ताल की है. आइए देखते हैं पूरी रिपोर्ट.

क्या है मामला?

नारायणपुर में रेलवे पटरी विस्तार परियोजना, जो विकास का प्रतीक मानी जा रही थी, अब यहाँ के किसानों के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गई है. मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बड़ी संख्या में प्रभावित किसान और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर वहां आ धमके.

किसानों का आरोप है कि प्रशासन उनके साथ छल कर रहा है. उन्हें वर्ष 2019-20 की पुरानी सरकारी दरों पर मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि जमीन की कीमतें अब बाजार में कई गुना बढ़ चुकी हैं. किसानों का कहना है कि जिन अन्य जिलों से यह रेलवे लाइन गुजर रही है, वहां बढ़ा हुआ मुआवजा मिल चुका है, लेकिन नारायणपुर के किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.

कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं.

  • पहली- भूमि अधिग्रहण का मुआवजा 2019 की बजाय वर्तमान बाजार मूल्य पर मिले.
  • दूसरी- प्रभावित परिवार के एक सदस्य को रेलवे में सरकारी नौकरी दी जाए.
  • और तीसरी- अधिग्रहित जमीन के बदले उन्हें खेती के लिए दूसरी जमीन मुहैया कराई जाए.

नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई ने किसानों को उचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया है. लेकिन, किसानों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अगर प्रशासन ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो वे सड़क पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी. अब देखना होगा कि प्रशासन विकास और किसानों के हितों के बीच तालमेल कैसे बिठा पाता है.

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