IAS Coaching Director Kidnapping Case: भोपाल में चर्चित IAS कोचिंग डायरेक्टर और यूपीएससी मेंटर शुभ्रा रंजन किडनैपिंग केस में जांच के दौरान एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे अपहरण कांड की साजिश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टूल्स की मदद से रची गई थी. आरोपियों ने न सिर्फ किडनैपिंग की योजना बनाई, बल्कि गिरफ्तारी से बचने, पैसों के लेन-देन और विदेश भागने तक की रणनीति भी तकनीक के सहारे तैयार की. इस मामले में अब तक पुलिस 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं. यह केस अब टेक्नोलॉजी आधारित संगठित अपराध के रूप में देखा जा रहा है.
AI की मदद से रची गई साजिश
पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी प्रियंक शर्मा ने पूरे अपराध की प्लानिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से की थी. जांच अधिकारियों के मुताबिक, प्रियंक ने AI टूल्स से यह समझने की कोशिश की कि किडनैपिंग को अंजाम कैसे दिया जाए, किन रास्तों और तरीकों से पुलिस से बचा जा सकता है और किस तरह डिजिटल ट्रैक छोड़े बिना गतिविधियां की जा सकती हैं.
Crime News: शुभ्रा रंजन किडनैपिंग केस
विदेश भागने तक की बनाई रणनीति
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने देश छोड़कर फरार होने की पूरी योजना पहले से तैयार कर रखी थी. प्रियंक शर्मा ने यूरोप के विभिन्न देशों के वीजा नियमों, वहां शरण लेने की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल से जुड़े विकल्पों की ऑनलाइन जानकारी जुटाई थी. पुलिस के अनुसार, इन जानकारियों को जुटाने के लिए भी उसने डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित टूल्स का सहारा लिया.
पैसों के ट्रांसफर और डिजिटल ट्रैक से बचने की कोशिश
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने किडनैपिंग के बाद फिरौती की रकम को ट्रांसफर करने और डिजिटल निगरानी से बचने के तरीकों पर भी गहन रिसर्च की थी. इसमें ऑनलाइन मनी ट्रांसफर, डिजिटल वॉलेट और ट्रैक से बचने की रणनीतियां शामिल थीं. बरामद डिजिटल डिवाइस से इन सर्च और प्लानिंग से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं.
6 आरोपी गिरफ्तार, 2 की तलाश जारी
इस केस में पुलिस अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. सभी से लगातार पूछताछ की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है. वहीं, दो आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं.
संगठित और टेक्नोलॉजी आधारित अपराध मान रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अपहरण की घटना नहीं है, बल्कि पारंपरिक अपराध और साइबर क्राइम का खतरनाक मेल है. जांच एजेंसियां अब प्रियंक शर्मा से जुड़े डिजिटल डेटा, मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क और साजिश की परतें पूरी तरह उजागर की जा सकें.
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