सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी भोजशाला परिसर में नमाज की इजाजत, आसपास व्यवस्था करने को कहा, ढांचा न बदलने का आदेश

धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. मुस्लिम पक्ष ने याचिका दायर कर 40 साल पुरानी स्थिति बहाल करने और शुक्रवार की नमाज पर लगी रोक हटाने की मांग की है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि ASI भोजशाला परिसर में कोई ढांचागत बदलाव न करे.

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धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान एक बेहद अहम मोड़ आया है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एएसआई (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर में कोई भी ढांचागत बदलाव यानि Structural Changes नहीं किया जाएगा. चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. इसके अलावा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जहां नमाज को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया, वहीं हाईकोर्ट द्वारा लंदन म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति वापस लाने के आदेश पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के बाद मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, DM और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में अगली सुनवाई होगी. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परिसर में शुक्रवार को नमाज़ पर रोक बरकरार रहेगी. इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार करते हुए कहा कि भोजशाला परिसर के पास नमाज के लिए हर शुक्रवार 1-3 के बीच अलग जगह मुहैया कराया जाए. 

नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का प्रस्ताव

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मुस्लिम पक्ष की मांग पर अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा. चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है.CJI सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से भी सवाल किया, "क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए ऐसी अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है." चीफ जस्टिस ने आगे कहा, "हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी. हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है."

मुस्लिम पक्ष के वकील हुजेफा अहमदी ने बेंच के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. हमें अब परिसर से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है और पिछले 40 साल से जो नमाज निर्बाध रूप से चल रही थी, उस पर भी अचानक रोक लगा दी गई है. सुनवाई के शुरुआत में ही मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि परिसर में पिछले 40 साल पुरानी स्थिति को दोबारा बहाल (Status Quo) किया जाए. इन दलीलों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी करेगा और आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय की जाएगी.

हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी हैरानी जताई, जिसमें लंदन म्यूजियम से देवी सरस्वती की मूर्ति वापस लाने की बात कही गई थी.बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा, "कोई संवैधानिक कोर्ट (Constitutional Court) इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है?"

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अदालत में मुस्लिम पक्ष की दलीलें

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा. मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा, "हम यहां साल 1935 से नमाज पढ़ रहे हैं. इस जगह की अपनी एक खास महत्ता है. शुरुआत में मुस्लिमों ने ही हिंदुओं को यहां जगह दी और उनके लिए व्यवस्था की थी, लेकिन अब हमें ही यहां से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है."सीनियर एडवोकेट ए.एम. सिंघवी ने हाईकोर्ट के फैसले के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, "मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपना आदेश इस तरह से पारित किया कि मेरे पास कोई मौका ही नहीं बचा और रातों-रात 40 साल से चली आ रही यथास्थिति (Status Quo) बदल गई, क्योंकि अगला दिन शनिवार का था."
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सभी याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई

इससे पहले मुस्लिम पक्ष के वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच से यह मांग की थी कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी केवल एक याचिका कल सुनवाई के लिए लिस्ट हुई थी, इसलिए बाकी की अन्य याचिकाओं को भी आज एक साथ सुना जाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील हुजैफा अहमदी को भरोसा दिलाया था कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जा सकती है.  
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