तीन मकान, तीन ऑटो, एक कार और ब्याज का धंधा, फिर भी भीख मांगने पर लखपति भिखारी ने बताई ये सच्चाई

Indore Beggar News Update: मांगीलाल खरगोन के ऊपरी गांव के रहने वाले हैं. कोढ़ के लक्षण होने पर करीब 12 साल पहले उन्हें घर से निकाल दिया गया. लिहाजा, वह इंदौर आकर बस गए. मांगीलाल ने बताया कि पहले वह लाइसेंस पर केरोसिन बेचते थे. 1985 के बाद उनके हाथ पैर खराब हो गए, जिसके कारण उन्हें बच्चों की तरह चलने वाली गाड़ी का सहारा लेना पड़ा.

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Indore Beggar Story: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) स्थित ग्राम अंबोदिया के आश्रम में दो दिन पहले लाए गए लखपति भिखारी की चर्चा चारों ओर बनी हुई है. मकान, कार, ऑटो और ब्याज का धंधा करने के बावजूद वह भिखारी क्यों बना और प्रशासन ने उसे किस तरह से पकड़ कर आश्रम भेजा. उसी की पड़ताल करने एनडीटीवी की टीम बुधवार को आश्रम पहुंची. यहां भिक्षुक ने जो बताया वह काफी चौंकाने वाला है.

दरअसल, इंदौर (Indore) में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान में महिला बाल विकास की टीम ने सराफा क्षेत्र से लोहे की गाड़ी पर घिसटकर चलते हुए भीख मांगने वाले मांगीलाल को पकड़ा था. पूछताछ में पता चला कि लोगों से एक-एक रुपये की भीख मांगने वाले इस शख्स के पास तीन मकान, तीन ऑटो, एक कार और ब्याज का धंधा भी है. बावजूद वह भीख मांगता है. इस जानकारी के बाद मांगीलाल लखपति भिखारी के नाम से मशहूर हो गया है.  हालांकि उसे 19 जनवरी को उज्जैन में 25 km दूर ग्राम अंबोदिया में स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम भेज दिया. इस जानकारी पर एनडीटीवी की टीम आश्रम पहुंची और उससे बचपन से लेकर अब तक की कहानी जानने की कोशिश की. इस दौरान मांगीलाल ने जो बताया वह काफी चौंकाने वाला है.

13 साल पहले आए इंदौर

मांगीलाल खरगोन के ऊपरी गांव के रहने वाले हैं. कोढ़ के लक्षण होने पर करीब 12 साल पहले उन्हें घर से निकाल दिया गया. लिहाजा, वह इंदौर आकर बस गए. मांगीलाल ने बताया कि पहले वह लाइसेंस पर केरोसिन बेचते थे. 1985 के बाद उनके हाथ पैर खराब हो गए, जिसके कारण उन्हें बच्चों की तरह चलने वाली गाड़ी का सहारा लेना पड़ा.

2 साल से कर रहा है भिक्षावृत्ति

मांगीलाल चौहान ने बताया कि उन्हें एक मकान सरकार से मिला है. वहीं, दो मकान उन्होंने खुद खरीदे हैं. इसके अलावा, बैंक से लोन लेकर तीन ऑटो रिक्शा और एक डिजायर ली. सभी टैक्सी के रूप में चलते हैं. वहीं, करीब चार लाख रुपये उन्होंने ब्याज पर दे रखे हैं. इनसे उन्हें प्रतिदिन दो हजार रुपये की आय होती है. 2023 से वह सराफा बाजार में रोज रात ब्याज का पैसा लेने के लिए अपनी भिक्षुक वाली गाड़ी से जाते हैं. इस दौरान लोग उन पर दया कर भिक्षा दे देते हैं. इस तरह 500 अतिरिक्त कमा लेते हैं.

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अब नहीं मांगेंगे भिक्षा

मांगीलाल चौहान ने ऐसे तो भिक्षा वृत्ति करने से इनकार किया है. उनका कहना है कि लोग अपनी मर्जी से उन्हें कुछ देते हैं, तो वह ले लेते हैं.  आश्रम भेजने पर कहा कि यहां रहना और खाना अच्छा लग रहा है, लेकिन यहां रहने से उनका बाजार में चल रहा पैसा वहां डूब जाएंगा. इसलिए अगर उन्हें प्रशासन वापस घर भेज देता है. तब भिक्षा वृत्ति नहीं करेंगे. वहीं, इस संबंध में आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि भिक्षा मांगने वालों की जगह देने वालों को पकड़ना चाहिए, जिससे कि इस रीति पर रोक लगा सके. 

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