Petrol Suicide Attempt Video: मध्य प्रदेश के छतरपुर कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक बुजुर्ग न्याय की मांग करते-करते अचानक आत्मदाह की चेतावनी देने लगे. देखते ही देखते उन्होंने अपने साथ लाया पेट्रोल अपने सिर पर उड़ेल दिया. मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने तुरंत उसे रोककर संभाला, कुर्सी पर बैठाया और बात सुननी शुरू की. घटना ने प्रशासनिक अमले को भी सकते में डाल दिया, जबकि वहां मौजूद लोग डर और हैरानी में रह गए.
कहां का है मामला?
यह पूरा प्रकरण छतरपुर जिले की तहसील चंदला के ग्राम बछौन का बताया जा रहा है. यहां शासकीय चरनोई भूमि को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. इसी विवाद से जुड़ी शिकायत लेकर बुजुर्ग कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई में पहुंचे थे.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बुजुर्ग अपनी बात रखते हुए बार-बार न्याय न मिलने की बात कह रहे थे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं हुआ तो वे “आत्मघाती कदम” उठा लेंगे. इसी दौरान उन्होंने अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया. अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत रोका, संभाला और स्थिति को नियंत्रित किया. कुछ देर के लिए जनसुनवाई स्थल पर हड़कंप और भागदौड़ की स्थिति बन गई.
किस जमीन को लेकर विवाद है?
विवाद ग्राम बछौन स्थित खसरा नंबर 1216/2, 1216/3, 1216/4 और 1216/5 से जुड़ा है. कुल रकबा 1.222, 0.400, 0.400, 0.400, 0.331 और 0.348 हेक्टेयर बताया गया है. राजस्व अभिलेखों में यह भूमि मध्य प्रदेश शासन के नाम दर्ज शासकीय और चरनोई भूमि के रूप में दर्ज है.
आदेश और कार्रवाई का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप है कि उमादेवी पत्नी रामसजीवन रिपौलिहा, निवासी बछौन ने शासन को गुमराह कर बिना वैधानिक प्रक्रिया के अपना नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया था. इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी, लवकुशनगर द्वारा 30 दिसंबर 2022 को आदेश और अपर कलेक्टर, छतरपुर द्वारा 21 जून 2024 को आदेश जारी किए गए, जिनमें जमीन को फिर से शासन के नाम दर्ज करने और अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे.
कब हटाया गया कब्जा?
इन आदेशों के पालन में नायब तहसीलदार मंडल बछौन ने 29 नवंबर 2024 को आदेश जारी कर अवैध कब्जा हटाने और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने की कार्रवाई बताई. इसके बाद 18 जनवरी 2025 को राजस्व अमला और पुलिस बल की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर फसल नष्ट की गई और भूमि पर शासन का कब्जा दोबारा स्थापित किया गया. प्रशासन का दावा है कि फिलहाल यह जमीन शासन के अधीन है.
बुजुर्ग का आरोप: तीन साल से भटक रहे
वहीं जनसुनवाई में पहुंचे बुजुर्ग का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली. उनका आरोप है कि कार्रवाई के दावे के बावजूद उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है, इसी हताशा में उन्होंने यह कदम उठाने की कोशिश की.
घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई. अधिकारियों ने मामले की फिर से जांच कराने, दोनों पक्षों की सुनवाई करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन देने की बात कही है. फिलहाल पूरे मामले को लेकर संबंधित विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और शिकायतों की समीक्षा की जा रही है.














