Madhya Prdaesh Rajya Sabha BJP Candidates: मध्य प्रदेश में तीसरी राज्यसभा सीट की लड़ाई अब सिर्फ चुनाव नहीं रही. यह अब एक नंबर की कहानी बन गई है 11, कभी यही 11 महेश केवट को बीजेपी से बाहर ले गए थे. अब लगभग यही 11 उन्हें राज्यसभा तक पहुंचा सकते हैं. गणित में ग्रैजुएट महेश केवट शायद इसी सियासी गणित को समझते हैं और बीजेपी भी यही जानती है.
दरअसल, बीजेपी ने मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मैदान में उतारकर इस चुनाव को सीधा राजनीतिक थ्रिलर बना दिया है. जो मुकाबला अब तक आसान गणित लग रहा था, वह अब वफादारी, क्रॉस वोटिंग और सियासी मैनेजमेंट की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है.
कभी केवट भी क्रॉस वोटिंग कारण हुए थे निष्कासित
महेश केवट की उम्मीदवारी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 2022 में वे और बीजेपी के 10 अन्य कार्यकर्ता, यानी कुल 11 लोग, पार्टी से निष्कासित किए गए थे. आरोप था कि निवाड़ी नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव में इन नेताओं ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया था. 27 जून 2022 को मंत्री भूपेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुए चुनाव के बाद प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर इन सभी 11 लोगों को छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया गया था.
राजनीति का पहिया अजीब ढंग से घूमता है...
जो महेश केवट कभी कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग के आरोप में बीजेपी से बाहर किए गए थे, वही अब कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी का तीसरा दांव बन गए हैं. बाद में उनका निष्कासन रद्द हुआ, वे पार्टी में लौटे, मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने, उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा मिला और अब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा की लड़ाई में उतार दिया है.
इसी से शुरू होता है 11 का दूसरा अध्याय
विधानसभा के गणित के अनुसार, बीजेपी दो राज्यसभा सीटें आसानी से जीत सकती है. दो सीटों के लिए जरूरी वोट निकालने के बाद बीजेपी के पास करीब 47 वोट बचते हैं. जीत का आंकड़ा 58 है. यानी तीसरी सीट जिताने के लिए बीजेपी को करीब 10 से 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. सीधे शब्दों में कहें तो महेश केवट की जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कांग्रेस या विपक्षी खेमे से लगभग 11 विधायक पाला बदलते हैं या क्रॉस वोटिंग करते हैं.
यही वजह है कि महेश केवट की उम्मीदवारी केवल नामांकन नहीं है, बल्कि कांग्रेस के लिए खुली चुनौती है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही संकेत दे चुके थे. जब उनसे तीसरी सीट को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था, “तीसरी सीट जीतेंगे, जाएगी कहां?” इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय भी कह चुके थे कि अगर पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो उसे जिताने की पूरी कोशिश की जाएगी. अब महेश केवट के मैदान में आने के बाद ये बयान महज आत्मविश्वास नहीं, बल्कि रणनीति का हिस्सा दिख रहे हैं.
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पहले RSS से जुड़े, फिर 1995 में भाजपा से
महेश केवट का सामाजिक समीकरण भी बीजेपी के लिए अहम है. गणित से ग्रैजुएट केवट समाज से आने वाले महेश केवट 1984 से आरएसएस से जुड़े रहे हैं और 1995 से बीजेपी की राजनीति में सक्रिय हैं. वे पार्षद रहे, ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रहे और अब राज्यसभा उम्मीदवार हैं. बीजेपी उन्हें एक ऐसे जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पेश कर रही है जिसे संगठन ने राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है.
कांग्रेस के लिए बजी खतरे की घंटी
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. मीनाक्षी नटराजन के पास कागज पर संख्या है, लेकिन अंतर बहुत बड़ा नहीं है. कांग्रेस के पास लगभग 61 प्रभावी वोट माने जा रहे हैं, जबकि जीत के लिए 58 वोट चाहिए। यानी कांग्रेस के पास सिर्फ कुछ वोटों की सुरक्षा है। ऐसे में अगर थोड़ी भी सेंध लगी तो मुकाबला पलट सकता है.
इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी है. पार्टी अपने विधायकों को तेलंगाना या कर्नाटक भेजने पर भी विचार कर रही है, ताकि किसी तरह की तोड़फोड़ या क्रॉस वोटिंग रोकी जा सके. तेलंगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी भी हैं.
विधानसभा में दोनों दल दिखाएंगे अपनी-अपनी दलील
सोमवार को विधानसभा में दोनों दल अपनी-अपनी ताकत दिखाएंगे. बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री मोहन यादव, वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक महेश केवट के नामांकन में मौजूद रहेंगे. वहीं, कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन के साथ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार रहेंगे. अब मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट सिर्फ एक सीट नहीं रह गई है.
यह कहानी है बीजेपी से निकाले गए 11 लोगों की और कांग्रेस से टूट सकने वाले 11 वोटों की. बीजेपी के लिए महेश केवट एक सोचा-समझा दांव हैं। कांग्रेस के लिए मीनाक्षी नटराजन संगठन की एकता की परीक्षा हैं. और मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए यह चुनाव अब नंबर 11 का सबसे दिलचस्प मुकाबला बन चुका है.