भोजशाला मस्जिद-मंदिर विवाद: अब हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई, पांच याचिकाएं लंबित, सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

Dhar Bhojshala Controversy: मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला कोई साधारण ढांचा नहीं है, यह समय के उस दौर की गवाह है जहां कभी वेद-पुराणों की ऋचाएं गूंजती थीं लेकिन आज इसी पर कानून की दलीलें सुनी जाती हैं.

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भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट की सुनवाई (भोजशाला की फाइल फोटो)

Bhojshala Dispute: धार जिले में स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद को लेकर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में अहम सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सभी पक्षकार अदालत में मौजूद रहे. पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट के जज भोजशाला का निरीक्षण कर चुके हैं. उस दौरान अदालत ने कहा था कि वे खुद मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की रिपोर्ट को वास्तविक स्थिति से मिलाएंगे. इसके बाद अगली सुनवाई का आदेश दिया गया था.

आज की सुनवाई क्यों थी अहम?

आज की सुनवाई को इसलिए अहम माना जा रहा था क्योंकि इसमें हाईकोर्ट का फैसला मान्य माना जाना है. अदालत में यह जानकारी दी गई कि कल सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर SLP पर क्या आदेश दिया है.

अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय

हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे तय कर दी है. अदालत ने कहा है कि अब लगातार इस मामले में सुनवाई की जाएगी.

पांच याचिकाएं लंबित, दोनों पक्षों ने रखी आपत्तियां

फिलहाल इस पूरे मामले में कुल पांच याचिकाएं चल रही हैं. मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि पिछली सुनवाई में भी मुख्य याचिका संख्या 10497, जो हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई है, उस पर आपत्तियां जताई गई थीं. उनका कहना है कि याचिका में पेश दस्तावेज और रिपोर्ट सभी तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.

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सिविल कोर्ट भेजने की मांग

मुस्लिम पक्ष की ओर से मांग की गई थी कि इस मामले को सिविल कोर्ट भेजा जाए. इसी क्रम में उन्होंने धार की सिविल कोर्ट में एक सिविल सूट भी दायर किया है, जिसकी सुनवाई 10 तारीख को होनी है.

सुप्रीम कोर्ट का रुख: HC ही करेगा अंतिम फैसला

इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई थी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भोजशाला परिसर की वीडियोग्राफी और ASI सर्वे से जुड़ी आपत्तियों पर विचार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा. हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि सभी आपत्तियों की सुनवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत होनी चाहिए.

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ASI वीडियो और तस्वीरों पर आपत्ति

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उन्हें ASI सर्वे की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें उपलब्ध नहीं कराई गईं. उनका कहना था कि जब तक यह सामग्री नहीं दी जाती, तब तक वे अपनी आपत्तियां ठीक से पेश नहीं कर सकते.

कोर्ट में चलेगा सर्वे का वीडियो

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कुछ आपत्तियों को सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है, जबकि कुछ पर अभी विचार होना बाकी है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित वीडियो कोर्ट में चलाया जाएगा, ताकि सभी पक्ष उसकी सत्यता पर अपनी बात रख सकें.

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी कोई राय

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है. उन्होंने भरोसा जताया कि हाईकोर्ट वीडियोग्राफी देखने के बाद सभी आपत्तियों पर निष्पक्ष तरीके से फैसला करेगा. साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी पक्ष को शिकायत हो तो वे हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं.

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