Bhojshala-Kamal Maula Mosque News: धार की बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी करते हुए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के सर्वे से जुड़ी याचिकाओं पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह मामला उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में है और वहीं पर कानून के अनुसार इसका फैसला होगा.
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्हें हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय सभी पक्षों की आपत्तियों और दलीलों पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत विचार करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी करने से भी परहेज किया.
पुलिस पक्ष ने की थी ये तीन मांग
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी करते हुए तीन प्रमुख बिंदु उठाए. उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया है. साथ ही सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें मस्जिद कमेटी को उपलब्ध कराई जाए और 2 अप्रैल को हाईकोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई को स्थगित किया जाए.
याची को हाईकोर्ट जाने की दी सलाह
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वीडियोग्राफी और अन्य तकनीकी आपत्तियों से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने का अधिकार हाईकोर्ट को है. ऐसे में मुस्लिम पक्ष अपनी सभी आपत्तियां और साक्ष्य हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.
हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होगी सुनवाई
मामले में हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट भी दायर किया था. सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब यह मामला इंदौर स्थित हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष 2 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.
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इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, जहां आगे की कानूनी दिशा तय होगी.
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