Twisha Sharma Death: नोएडा की रहने वाली 31 साल की ट्विशा शर्मा की भोपाल में उनके ससुराल में हुई मौत ने देश को झकझोर दिया है. उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर लंबे समय से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, दहेज के लिए परेशान करने का आरोप लगाया है. ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma Death) करीब दो महीने की गर्भवती भी थीं, 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने पति के घर पर फंदे से लटकी मिलीं.
उन्होंने दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से शादी की थी. समर्थ सिंह रिटायर्ड सेशन जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं. त्विषा और समर्थ की मुलाकात 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी.
पिता ने किए चौंकाने वाले खुलासे
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उसके पिता नवनिधि शर्मा ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने बताया कि समर्थ ने हनीमून के दौरान ही ट्विशा से बदसलूकी की थी और गुस्से में आकर उसे धक्का दे दिया था. उसे इस घटना से बड़ा झटका लगा, लेकिन उसने सोचा कि उसे अभी अपने रिश्ते तो समय देना चाहिए.

वो परेशान थी और पिता से भी कहा था कि वह वापस आना चाहती है. त्विषा के पिता ने बताया कि वह अपने रिश्ते को मौका दे रही थी कि किसी तरह अपनी शादी बचा सके. उन्होंने कहा, ‘हिंदू परंपरा है, बेटियां बहुत कुछ सह लेती है अपनी शादी और सुहाग बचाने के लिए. वह अपनी शादी एक झटके में तोड़ना नहीं चाहती.'
ट्विशा शर्मा के पिता की इन बातों ने जहन में कई सवाल उठा दिए. क्यों आज की मॉर्डन लड़की भी समाज के पुराने और खोखले दवाबों को झेल रही है. यहां हमें यह समझने की जरूरत है कि हमें अपनी बेटियों को क्या सिखाने और खुद क्या सीखने की जरूरत है.
बेटियों को क्या सिखाना जरूरी है? मजबूत और आत्मनिर्भर बनने के लिए ये बातें ज़रूर बताएं
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी जिंदगी में खुश और सुरक्षित रहे. लेकिन आज के समय में सिर्फ पढ़ाई या संस्कार ही काफी नहीं हैं- बेटियों को खुद के लिए खड़ा होना और सही-गलत पहचानना भी सिखाना जरूरी है.
अगर बचपन से ही कुछ जरूरी बातें सिखा दी जाएं, तो बेटियां जिंदगी के हर पड़ाव पर मजबूत फैसले ले सकती हैं.
‘ना' कहना सीखें – सबसे जरूरी स्किल
बेटियों को बचपन से यह समझाना जरूरी है कि उन्हें हर बात मानने की जरूरत नहीं है. अगर कोई बात उन्हें गलत लगती है या असहज करती है, तो वे साफ “ना” कह सकती हैं. सिर्फ “लोग क्या कहेंगे” या “समाज क्या सोचेगा” के डर से किसी भी बात को स्वीकार करना जरूरी नहीं है.
याद रखें: खुद की इच्छा और सम्मान सबसे ऊपर है.
अपनी सेफ्टी के लिए बाउंड्री बनाना सिखाएं
हर लड़की को अपनी सीमाएं तय करना आना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति फिजिकली या मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे, तो चुप न रहें. तुरंत परिवार या भरोसेमंद लोगों से बात करें. जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद लेने से भी न हिचकें.
खुद को नुकसान पहुंचाने के बजाय हमेशा समाधान की ओर बढ़ना सिखाएं.
इन बातों को कभी इग्नोर न करें
- बच्चियों को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी तरह का अपमान या गलत व्यवहार सामान्य नहीं है.
- अगर कोई बार-बार मेंटल या फिजिकल रूप से परेशान कर रहा है. रिश्ते में घुटन महसूस हो रही है. रोज-रोज अपमान झेलना पड़ रहा है.
- तो उसे सहने की जरूरत नहीं है. ऐसे रिश्तों को समय देना हमेशा सही नहीं होता.
- सबसे जरूरी: उन्हें भरोसा दिलाएं कि परिवार हमेशा उनके साथ है.
दोस्तों को न छोड़ें – ये भी जरूरी सहारा हैं
अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद लड़कियां अपने दोस्तों से दूरी बना लेती हैं. लेकिन दोस्त वो होते हैं जिनसे आप खुलकर बात कर सकते हैं. कई बार जो बातें परिवार से नहीं कह पाते, वो दोस्तों से कहकर हल निकल सकता है. इसलिए बेटियों को सिखाएं कि जिंदगी के किसी भी चरण में अपने दोस्तों का साथ बनाए रखें.
माता-पिता किन बातों का रखें खास ध्यान?
- बेटी की बात को हल्के में न लें : अक्सर जब शादी के बाद बेटी शिकायत करती है, तो उसे समझाया जाता है- “सब ठीक हो जाएगा, थोड़ा समय दो…” लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. उसकी बात को ध्यान से सुनें और समझें.
- उसे कभी ‘पराया' न मानें : बेटी शादी के बाद भी आपकी ही जिम्मेदारी और सहारा होती है. उसे यह एहसास होना चाहिए कि वह जब चाहे घर लौट सकती है.
- समाज के डर में फैसले न लें : जब बेटी कहे कि वह वापस आना चाहती है, तो “लोग क्या कहेंगे” सोचकर उसे रोकना गलत है. उसकी खुशी और सुरक्षा सबसे जरूरी है.
- दोस्तों और सपोर्ट सिस्टम को बनाए रखें : बेटी के दोस्तों को घर बुलाएं. यह सुनिश्चित करें कि उसका सोशल नेटवर्क बना रहे.
- ससुराल से संवाद बनाए रखें : अगर बेटी कोई परेशानी बताए, तो सीधे बात करें बिना दबाव में आए समाधान निकालने की कोशिश करें
- छोटा सा संदेश, बड़ा फर्क : बेटियों को मजबूत बनाने का मतलब सिर्फ पढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें अपनी बात रखने, अपनी सुरक्षा करने, सही फैसले लेने की ताकत देना है.
“बेटियों को कमजोर नहीं, समझदार और आत्मनिर्भर बनाना ही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.”
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