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जोड़ों के दर्द, गैस और बेचैनी की वजह है वात दोष? जानिए आयुर्वेदिक समाधान

आयुर्वेद में वात दोष को 'वायु और आकाश' से जोड़ा गया है, जो हमारे शरीर में ऊर्जा के लिए जिम्मेदार है. इसके अलावा वात दोष का असंतुलन शरीर में गति, संचार, श्वास, हृदय गति, त्वचा, बालों और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. वात दोष को संतुलित करने के लिए आयुर्वेद में बहुत सारे तरीके बताए गए हैं.

जोड़ों के दर्द, गैस और बेचैनी की वजह है वात दोष? जानिए आयुर्वेदिक समाधान
वात दोष से राहत दिलाएंगे आर्युर्वेदिक नुस्खे.

आयुर्वेद में शरीर को संतुलित करने के लिए तीन दोषों-वात, पित्त और कफ का संतुलन जरूरी होता है. ये तीनों दोष शरीर के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन आज हम वात दोष के बारे में जानेंगे कि शरीर में इसे कैसे संतुलित किया जा सकता है. आयुर्वेद में वात दोष को 'वायु और आकाश' से जोड़ा गया है, जो हमारे शरीर में ऊर्जा के लिए जिम्मेदार है. इसके अलावा वात दोष का असंतुलन शरीर में गति, संचार, श्वास, हृदय गति, त्वचा, बालों और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. वात दोष को संतुलित करने के लिए आयुर्वेद में बहुत सारे तरीके बताए गए हैं, जिसमें पहला है स्नेहपान यानी तेल का सेवन.

तेल का सेवन

बढ़े हुए वात को शांत करने के लिए तिल के तेल का सेवन करना चाहिए. तिल का तेल तासीर में गर्म होता है और शरीर की वायु यानी वात को संतुलित करने में मदद करता है. इसका सेवन खाने में मिलाकर किया जा सकता है.

अभ्यंग करना

दूसरा तरीका है अभ्यंग करना. वात का सीधा संबंध रुखेपन से है. अगर शरीर में वात असंतुलित है तो बालों से लेकर त्वचा में रुखापन बढ़ जाता है. ऐसे में किसी भी तेल से किया गया अभ्यंग त्वचा को गहराई से पोषण देने का काम करता है. अगर पूरे शरीर पर तेल नहीं लगा सकते हैं तो सिर, पैर और कानों के पीछे जरूर लगाएं. ये तंत्रिका-तंत्र को एक्टिव करने का काम करता है.

स्वेदन

तीसरा है स्वेदन. स्वेदन का मतलब है पसीना लाना. वात तभी संतुलित रहता है, जब शरीर से पसीना विषाक्त पदार्थों के साथ बाहर आता है. ऐसे में एक्सरसाइज के जरिए या भी योग के जरिए पसीना लाने की कोशिश करें. इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह भी होगा.

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अच्छी डाइट

चौथा है अच्छा आहार. वात को संतुलित करने के लिए आहार में तीन रस शामिल होने जरूरी हैं, जिनमें खट्टा, मीठा और लवण यानी नमकीन शामिल हैं. ये तीन रस वात को संतुलित करने में मदद करते हैं. ध्यान रहे कि खाना गरम-गरम ही खाएं और खाने में ये तीनों रस मौजूद हों.

पट्टी बांधना

पांचवां है वेष्टन यानी पट्टी बांधना. शरीर में जब वात की वृद्धि होती है, हड्डियों से जुड़े रोग परेशान करते हैं. ऐसे में जिस हिस्से पर सबसे ज्यादा दर्द हो वहां गर्म पट्टी बांधें. ये दर्द में आराम दिलाने के साथ वात का शमन करेगा.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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