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हर समय रहता था पार्टनर को खोने का डर? ऐसे समझ आया कि मैं रिलेशनशिप एंग्जायटी का शिकार हूं

रिलेशनशिप एंग्जायटी एक बहुत ही आम समस्या है, जिससे कइयों को गुजरना पड़ता है. इस आर्टिकल में पायल की कहानी से समझें कैसे पहचाने और किन बातों का रखें ध्यान.

हर समय रहता था पार्टनर को खोने का डर? ऐसे समझ आया कि मैं रिलेशनशिप एंग्जायटी का शिकार हूं
रिलेशनशिप एंग्जायटी क्या है. (Image NDTV)

​उसने मेरा मैसेज देख लिया, पर रिप्लाई नहीं किया क्या वो मुझसे बोर हो गया है? कल रात उसने मुझसे थोड़े रूखे लहजे में बात की थी, कहीं उसका किसी और से चक्कर तो नहीं चल रहा? कहीं वो मुझे छोड़ तो नहीं देगा. ​नोएडा की एक बड़ी कंपनी में काम करने वाली 26 साल की पायल के दिमाग में हर समय बस यही सब चलता रहता था. 

पायल और उसके पार्टनर का रिश्ता बाहर से देखने में बिल्कुल परफेक्ट था. दोनों वीकेंड्स पर घूमते थे, साथ में डिनर करते थे. लेकिन पायल हर रोज एक अंदरूनी जंग लड़ रही थीं पार्टनर को खोने का डर.

​इस आर्टिकल में आज पायल की कहानी के जरिए हम समझेंगे कि यह डर क्या है. आपको बता दें कि इस डर को मेडिकल की भाषा में रिलेशनशिप एंग्जायटी (Relationship Anxiety) कहते हैं. आइए जानते हैं कि पायल को इसका अहसास कैसे हुआ और इससे बाहर निकलने के लिए उन्होंने क्या किया.  

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पायल को क्यों रहता था हर समय पार्टनर को खोने का डर. (Image NDTV)

​जब केयर की जगह लगा डर-

​पायल बताती हैं, शुरुआत में मुझे लगता था कि मैं अपने पार्टनर से बहुत ज्यादा प्यार करती हूं, इसलिए मुझे उसकी इतनी फिक्र रहती है. अगर वो ऑफिस से घर लेट पहुंचता, तो मेरे हाथ-पैर ठंडे होने लगते थे. लेकिन धीरे-धीरे यह फिक्र एक डर में बदलने लगी. मैं दिन में पचास बार उसका लास्ट सीन चेक करने लगी.

अगर वो दोस्तों के साथ बाहर जाता, तो मुझे लगता कि वो मुझे इग्नोर कर रहा है. ​यही रिलेशनशिप एंग्जायटी का सबसे बड़ा लक्षण है. इसमें इंसान को अपने पार्टनर पर भरोसा होने के बावजूद एक अनजाना डर सताता रहता है कि रिश्ता कभी भी टूट सकता है.

​पायल को कैसे समझ आया कि वो एंग्जायटी का शिकार है- 

  1. ओवरथिंकिंग- पार्टनर के हर छोटे एक्शन या बात का गहरा मतलब निकालना. जैसे- उसने 'गुड नाइट' के साथ हार्ट इमोजी नहीं भेजा, मतलब कुछ गड़बड़ है. ​
  2. बार-बार पूछना- पार्टनर से बार-बार यह पूछना कि क्या तुम मुझसे अभी भी प्यार करते हो? या तुम मुझे कभी छोड़ोगे तो नहीं?
  3. खुद को कमतर समझना- हर वक्त यह लगना कि मैं अपने पार्टनर के लायक नहीं हूं और वो मुझसे बेहतर किसी को ढूंढ लेगा.
  4. ​पार्टनर के मूड से खुद का मूड तय करना- अगर पार्टनर का दिन खराब रहा और वो शांत है, तो यह मान लेना कि वो मुझसे नाराज है.
  5. ​लड़ाई-झगड़े से डरना- रिश्ते में छोटी-मोटी बहस होना आम है, लेकिन एंग्जायटी से जूझ रहे इंसान को लगता है कि हर छोटी बहस का अंजाम ब्रेकअप ही होगा.

​रिश्ते पर कैसे पड़ता है इसका बुरा असर?

​पायल की इस आदत का असर उनके रिश्ते पर दिखने लगा. उनके पार्टनर को लगने लगा कि पायल उन पर शक कर रही हैं. पायल कहती हैं, एक दिन हमारे बीच बहुत बड़ा झगड़ा हुआ. उसने मुझसे साफ कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूं लेकिन तुम्हारी ये घबराहट और हर वक्त का शक मुझे थका रहा है. उस दिन मुझे अहसास हुआ कि अपने डर के चक्कर में, मैं खुद अपने हाथों से अपना रिश्ता खराब कर रही हूं.

रिलेशनशिप एंग्जायटी सिर्फ आपको ही नहीं, बल्कि आपके पार्टनर को भी मानसिक रूप से थका देती है. इसे असुरक्षा की भावना भी कहा जा सकता है, जो धीरे-धीरे रिश्ते की नींव को कमजोर कर देती है.

​इस चीज से कैसे बाहर निकलीं पायल?

​जब पायल को समझ आ गया कि समस्या पार्टनर या रिश्ते में नहीं, बल्कि उनके अपने विचारों में है, तो उन्होंने इस पर काम करना शुरू किया. 

​1. खुलकर बात की- 

​पायल ने अपने पार्टनर को बैठकर शांति से समझाया कि वो जो करती हैं, वो शक की वजह से नहीं बल्कि एक अजीब से डर की वजह से करती हैं. जब पार्टनर ने उनकी इस मानसिक स्थिति को समझा, तो उन्होंने पायल को सपोर्ट करना शुरू किया.

​2. खुद को बिजी रखा- 

मैंने नोटिस किया कि जब मेरे पास कोई काम नहीं होता था, तब मेरा दिमाग ज्यादा चलता था, पायल ने बताया. उन्होंने जिम जाना शुरू किया, अपने पुराने दोस्तों से मिलना-जुलना बढ़ाया और वीकेंड्स पर पेंटिंग करना शुरू किया. 

टेक्सास हेल्थ की रिसर्च के अनुसार दोस्तों के साथ मिलना और बातचीत करने से मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है.

टेक्सास हेल्थ की रिसर्च

​3. थेरेपिस्ट की मदद- 

​पायल ने हिचकिचाने के बजाय एक कॉउंसलर से बात की. थेरेपी के जरिए उन्हें काफी मदद मिली. 

यह लेख हमारे एक पाठक का नीज‍ि अनुभव है. इसमें व्‍यक्‍त व‍िचार उनके अपने हैं.

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